अलगाववादी नेता फारूक अब्दुल्लाह, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने सरकार के इस फैसले पर अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की सरकार के इस फैसले के खिलाफ दिखे।

कुछ दिनों पहले ही मोदी सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर सबको चौंका दिया था। दरअसल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कश्मीर दौरे पर गए थे जहां पर उन्होंने सेना के कुछ उच्च अधिकारियों के साथ मीटिंग की। और वापस दिल्ली आते ही कश्मीर घाटी की सुरक्षा बढ़ा दी गई। और उसके बाद कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला ले लिया गया।

मोदी सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर सभी को चौंका दिया। सरकार के इस फैसले का कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने विरोध किया। अलगाववादी नेता फारूक अब्दुल्लाह, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने सरकार के इस फैसले पर अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की सरकार के इस फैसले के खिलाफ दिखे।

फारूक अब्दुल्लाह को लेकर ओवैसी ने दिया बड़ा बयान, कहा सरकार...मोदी सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर के कई बड़े नेताओं के अपने हिरासत में ले लिया। इसमें उमर अब्दुल्लाह, फारूक अब्दुल्ला, और महबूबा मुफ्ती प्रमुख थे। जम्मू कश्मीर के नेताओं को हिरासत में लेने पर राजनीति भी अपने चरम पर पहुंच गई थी। कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने इसका विरोध किया। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने दावा किया कि यह कश्मीर की सुरक्षा के लिए किया गया है।

भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के तुरंत बाद जम्मू कश्मीर के कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया था। जम्मू कश्मीर के बड़े नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर विपक्ष ने इसकी कड़ी आलोचना की थी। लेकिन सरकार ने दावा किया था कि जम्मू कश्मीर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही इन्हें हिरासत में रखा गया है। भारत सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि फारूक अब्दुल्ला को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में रखा गया है। इस एक्ट के तहत बिना किसी सुनवाई के किसी को भी दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।

फारूक अब्दुल्लाह को लेकर ओवैसी ने दिया बड़ा बयान, कहा सरकार...
कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह को हिरासत में रखने पर ओवैसी ने बड़ा बयान दिया है उन्होंने कहा है कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के ठीक पहले फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। ऐसे में वे देश के लिए खतरा कैसे हो सकते हैं। उन्होंने अपने बयान में आगे कहा है कि आखिर 80 साल के शख्स से सरकार को किस प्रकार का डर है।