नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के नाम पर देश में विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। प्रत्येक दिन इस विवाद में कोई नई कड़ी जुड़ कर सामने आ जाती है।

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के नाम पर देश में विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। प्रत्येक दिन इस विवाद में कोई नई कड़ी जुड़ कर सामने आ जाती है। बीते कुछ दिनों से देश में सरकार के खिलाफ विरोध बढ़ता नजर आ रहा है। चाहे फिर फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों का प्रदर्शन हो या फिर एनआरसी (NRC), सीएए (CAA) पर धर्म पर राजनीति या कैंपस (Campus) में घुसकर छात्रों की पिटाई का मामला, हर एक मामले में सरकार बैकफुट पर है। देश के लोग हर एक मामले पर सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। सवाल पूछ रहे हैं लेकिन सरकार जवाब देने में असमर्थ होती नजर आ रही है।

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सीएए के खिलाफ देश में प्रदर्शन के बीच कांग्रेस (Congress) ने एक विचारधारा वाली पार्टियों को सोमवार को आयोजित बैठक में बुलाया था। ताकि सीएए के खिलाफ सब एकजुट होकर रणनीति तैयार कर सके। साथ ही छात्रों के साथ हुई बर्बरता को लेकर भी सभी विपक्षी दल संसद के उपभवन में बैठक करेंगे।

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इस बैठक में कांग्रेस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम), समाजवादी पार्टी, आरजेडी, लेफ्ट, एयूडीएफ और अन्य दलों को एकजुट होने को कहा था। लेकिन इस बुलावे के बावजूद तीन प्रमुख दल बैठक में शामिल नहीं हुए। जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने सीएए के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाने वालों में से एक हैं। ममता ने बंगाल में नागरिकता कानून को न सिर्फ लागू करने से मना किया। यहां तक कि इसके खिलाफ सड़को पर भी उतर गई। इन सब विरोध के बाद भी ममता बैठक में शामिल नहीं हुई। ममता की तरह सीएए का विरोध करने वाले विपक्ष नेता अरविंद केजरीवाल और मायावती भी इस बैठक से नदारद थे।