मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने एक बयान में कहा की, “अगर एनआरसी दिल्ली में लागू हो गया, तो सबसे पहले मनोज तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी।

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) पर राजनीति दलों में तू-तू-मैं-मैं बढ़ गई है। राज्य में इस मामले में बीजेपी और आम आदमी पार्टी ‘आप’ आमने सामने आ गए हैं। आपकों बता दे कि असम में एनआरसी लागू होने के बाद बीजेपी लगातार कोशिश कर रही है कि प्रदेशों में भी एनआरसी लागू कर दी जाए जिससे राज्य के लोग अपनी नागरिकता खोने से डर है। बीजेपी लगातार प्रशासित प्रदेशों में एनआरसी लागू करने की मांग उठा रही है।

हाउडी मोदी कार्यक्रम के लिए रवीश कुमार ने मोदी पर साधा निशाना…

Related image

हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित सात राज्यों के मुख्य मंत्रियों ने समर्थन देते हुए अपने-अपने प्रदेशों में एनआरसी की मांग की है। लेकिन अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बयान के बाद से इस मुद्दे ने अलग ही रंग ले लिया है। दरअसल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने एक बयान में कहा की, “अगर एनआरसी दिल्ली में लागू हो गया, तो सबसे पहले मनोज तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी।”एक संवाददाता सम्मेलन से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी नेता मनोज तिवारी पर तंज कसते हुए ये कहा था कि दिल्ली में जल्दी ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में कोई भी पार्टी किसी भी मुद्दे को हाथ से जाने नहीं देना चाहती।

केजरीवाल के बयान के कुछ वक़्त बाद ही बीजेपी नेता मनोज तिवारी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि “हम पूछना चाहते हैं कि क्या अरविंद केजरीवाल जी आप ये कहना चाहते हैं कि पूर्वांचल से आया हुआ व्यक्ति अवैध घुसपैठिया है? दिल्ली से भगाएंगे उसको? प्रवासी लोग जो उत्तरांचल, हिमाचल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से आए हैं, उन्हें आप विदेशी समझते हैं? दिल्ली से भगाएंगे उनको?” साथ ही कहा कि आप भी तो उन्हीं में से एक हैं।

चिन्मयानन्द केस में आया नया मोड़, आरोप लगाने वाली लड़की पुलिस के हिरासत में!

Image result for arvind kejriwal and manoj tiwari

अगर आपकी ऐसी मंशा है तो मैं समझता हूं कि आप मानसिक रूप से दिवालिया हो गए हैं। दूसरा सवाल यह उठता है कि एक आईआरएस अधिकारी को ये नहीं पता कि एनआरसी क्या है?” हालांकि ये पूरा मामला यूं ही शुरु नहीं हुआ है। बताते चले कि दिल्ली में आख़िर दिल्ली का कौन है’ एनआरसी का यह मुद्दा किस तरीक़े से आगे बढ़ेगा ये तो आने वाला वक़्त बताएगा लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि अगले साल दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव तक इसे लेकर बहस का बाजार गरम रहेगा।