MS DHONI B’DAY SPECIAL : रन आउट होने से लेकर वर्ल्ड चैंपियन बनने की कहानी|

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रांची के राजकुमार धोनी का आज जन्मदिन
World MSdians.. day

MS DHONI:भारत के सफलतम कप्तान रहे माही के नाम से मशहुर रांची के राजकुमार धोनी की उपलब्धियां

पूर्व भारतीय कप्तान धोनी का आज जन्मदिन है, या फिर यूं कहे की भारत के सफलतम कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी का आज जन्मदिन है। कितने नाम कितने रिकार्ड और न जाने कितनी उपलब्धियां अपने खेल से माही ने हासिल की है। 7 जुलाई 1981 को रांची में धोनी का जन्म हुआ। मुलतः उत्तराखंड से संबंध रखने वाले धोनी के पिता पान सिंह को सन् 1964 में मेकॉन में जूनियर पद पर नौकरी मिलने के बाद वो रांची आ गए थे। जिस वक्त धोनी का जन्म हुआ उस समय उनके पिता एक पंप ऑपरेटर के तौर पर कार्य करते थे। किसने सोचा था की पंप ऑपरेटर पान सिंह का बेटा आने वाले समय में क्रिकेट की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाएगा। जिसका नाम भारत के सफलतम कप्तानों की सूची में शामिल होगा। माही के नाम से मशहुर रांची के राजकुमार MS DHONI झारखंड के पहले ऐसे क्रिकेटर है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का प्रतिनिधित्व किया। तो चलिए आज महेंद्र सिंह धोनी के जन्मदिन के मौके पर आपको धोनी के रन आउट होने से लेकर वर्ल्ड चैंपियन बनने तक की कहानी से आपको रु-ब-रु करवाते है………..

पहले मैच में रन आउट हुए धोनी

क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके महेंद्र सिंह धोनी ने 23 दिसंबर 2004 को बांग्लादेश की जमीं पर अपने करियर की शुरुआत की थी। अपने पहले ही मैच में माही बिना खाता खोले रनआउट हो गए थे। अपने करियर की शुरुआती चार पारियों में धोनी कुछ खास असर नहीं छोड़ पाए। धोनी की खेली गई शुरुआती 4 पारियों में धोनी का सर्वाधिक स्कोर महज 12 रन था।

धोनी को मिला गांगुली का साथ

MS DHONI

अपने करियर की शुरुआती चार पारियों में खराब प्रदर्शन के कारण MS DHONI को लगने लगा था कि शायद उन्हें अब दोबारा मौका नहीं मिलेगा। लेकिन विशाखापटनम में पाकिस्तान के साथ खेले गए मैच ने उनकी किस्मत ही बदल कर रख दी। जिसमें सबसे ज्यादा योगदान उस समय भारतीय टीम के कप्तान सौरव गांगुली का माना जाता है। लगातार खराब फार्म में चल रहे धोनी की बल्लेबाजी से गांगुली बेहद प्रभावित थे, जिसके चलते उन्होंने माही को अपनी जगह नंबर तीन पर खेलने का सुझाव दिया। धोनी के लिए यह मौका करो या मरो वाला था। जिसे माही ने भी जाया नहीं जाने दिया, गांगुली के इस विश्वास को सही ठहराते हुए माही ने उस मैच में 148 रनों की धमाकेदार पारी खेली। जिसके साथ ही वह भारत की ओर से शतक बनाने वाले पहले रेगुलर विकेटकीपर बल्लेबाज बन गए। इसके बाद धोनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर श्रीलंका के खिलाफ धोनी ने 183 रनों की धुंआधार पारी खेली। जिसने क्रिकेट की दुनिया में धोनी को एक नई पहचान दिलाई।

टी-20 विश्व कप विजेता 

MS DHONI Birthday
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अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से लगातार विरोधियों के लिए दहशत बने MS DHONI के करियर की नई पारी का अब आगाज होने जा रहा था। 2007 में क्रिकेट वर्ल्ड कप में मिली हार के बाद भारतीय टीम पूरी तरह से टूट चुकी थी। इसी साल पहले टी-20 वर्ल्ड कप का आगाज होना था। क्रिकेट के इस तेजतर्रार फार्मेट में सेलेक्टर ने धोनी को कप्तानी सौंपी। सेलेक्टर की विश्वास पर खरा उतरते हुए माही की अगुवाई में भारतीय टीम ने पहले टी-20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। धोनी की इस उपलब्धि के बाद धोनी का कद और औहदा दोनो बड़ा। टी-20 के अलावा धोनी को वनडे और टेस्ट टीम का भी कप्तान बनाया गया। धोनी को कप्तानी मिलने के बाद भारतीय टीम ने वनडे और टेस्ट में अपनी बादशाहत कायम की। यह धोनी की कप्तानी का ही नतीजा था जो भारतीय टीम ने क्रिकेट के दोनों फार्मेट में नंबर एक के पायदान में पहुंचने में सफलता हासिल की। अब धोनी की नजर 2011 में होने वाले क्रिकेट के सबसे बड़े महाकुंभ में विजयी पताका फहराने पर थी। यह इसलिए भी जरुरी था क्योंकि 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप भारत में खेला जाना था।

28 साल बाद बने वर्ल्ड चैंपियन    

2007 टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारत को क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। माही की कप्तानी में भारतीय टीम ने वर्ल्ड कप का आगाज 2007 में बांग्लादेशियों से मिली हार का बदला लेते हुए बांग्लादेश को उसी की जमीं पर हराकर की। इसके बाद भारत ने आयरलैंड, नीदरलैंड, वेस्ट इंडीज को हराकर क्वार्टर फाइनल तक का सफर पुरा किया। क्वार्टर फाइनल में भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से होना था। भारत ने यहां भी अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए कंगारुओं को 5 विकेट से हराकर सेमिफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। इसके बाद भारत को सेमिफाइनल में अपने चीर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान से भिड़ना था। वर्ल्ड कप में लगातार बेहतर प्रदर्शन करती आ रही भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में भी अपने शानदार फार्म को जारी रखते हुए पाकिस्तान को 29 रनों से हराकर वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई।

वर्ल्ड चैंपियन बनने का आखिरी पड़ाव

वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान जैसी मजबुत टीमों को धूल चटाकर फाइनल तक पहुंचने वाली टीम इंडिया को फाइनल में श्रीलंका से दो-दो हाथ करने थे। फाइनल मुकाबले में संगाकारा, जयवर्धने,लसिथा मंलिगा जैसे सितारों से भरी श्रीलंका टीम से पार पाना भारत के लिए आसान नहीं था। लेकिन MS DHONI की करिश्माई कप्तानी का जादू फाइनल में भी देखने को मिला। जहां भारतीय टीम ने 275 रनों के पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करते हुए 6 विकेट से मैच अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही भारत ने 28 साल बाद एक बार फिर वर्ल्ड चैंपियन बना। जिसके साथ ही 2 वर्ल्ड कप जीतने वाले धोनी भारत के पहले कप्तान बन गए।

मिनी वर्ल्ड कप पर भी किया कब्जा

वर्ल्ड कप 2011 में जीत हासिल करने के बाद MS DHONI की सेना 2013 में इंग्लैंड खेले जा रहे मिनी वर्ल्ड कप यानि चैंपियस ट्रॉफी में हिस्सा लिया। वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारत की नजर चैंपियस ट्राफी के खिताब पर कब्जा जमाने की थी। भारत ने ऐसा कर भी दिखाया, इंग्लैंड के साथ खेले गए चैंपियस ट्रॉफी के फाइनल में भारत ने मेजबानों को धूल चटाते हुए चैंपियस ट्रॉफी का खिताब भी अपने नाम किया।

तो यह थी धोनी के रन आउट होने से लेकर वर्ल्ड चैंपियन बनने की कहानी। माही अपने खेल और अपने कूल अंदाज से दुनियाभर में फैन्स के दिलों पर राज करते है। सचिन के बाद माही ऐसे दूसरे भारतीय लैजेंड है जिनके स्टेडियम में कदम रखते ही पूरा स्टेडियम धोनी-धोनी की गूंज से सराबोर हो जाता है। तो माही को एबीस्टार न्यूज की तरफ से जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं, और आशा यही रहेगी की आने वाले वक्त में भी हम बार-बार यह सुने की माही मार रहा है।

 

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