अपना पूरा जीवन दूसरो के लिए अर्पित करने वाली मदर टेरेसा की आज 109वीं जयंती है।

खुद के लिए तो हर कोई जीता है पर दूसरो के लिए जीने वाले बहुत कम होते है। ऐसी ही एक महान शख्सीयत हैं जिन्हे लोग मदर टेरेसा के नाम से जानते है जिन्होने अपनी पूरी जिंदगी दूसरो की सेवा मे गुजार दी। संसार के तमाम दीन-दरिद्र, बीमार, असहाय और गरीबों के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। बहुत कम लोगों को यह बात पता होगी कि मदर टेरेसा का असली नाम ‘ अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ था। “गोंझा” जिसका अर्थ होता है फूल की कली।

दया की मूर्ति मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को स्कॉप्जे (अब मसेदोनिया में) में एक अल्बेनीयाई परिवार में हुआ। मदर टेरेसा कैथोलिक थीं, लेकिन उन्हें भारत की नागरिकता मिली हुई थी। उन्हें भारत के साथ साथ कई अन्य देशों की नागरिकता मिली हुई थी उनके पिता निकोला बोयाजू एक साधारण व्यवसायी थे। जब वह आठ साल की थी तब उनके पिता की मुत्यू हो गई थी जिसके बाद पूरे घर की जिम्मेदारी उनकी माता पर आ गई थी।

जब वह 18 वर्ष की हुई तभी से मदर टेरेसा ने समाज सेवा को अपना ध्येय बनाते हुए मिस्टरस ऑफ लॉरेंटो मिशन से खुद को जोड़ा। सन् 1928 में मदर टेरेसा ने रोमन कैथोलिक नन के रूप में कार्य शुरू किया। दार्जिलिंग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मदर टेरेसा ने कलकत्ता का रुख किया।

24 मई 1931 को कलकत्ता में मदर टेरेसा ने ‘टेरेसा’ के रूप में अपनी एक पहचान बनाई। मदर टेरसा रोमन कैथोलिक नन थीं। मदर टेरेसा ने ‘निर्मल हृदय’ और ‘निर्मला शिशु भवन’ के नाम से आश्रम खोले, जिनमें वे असाध्य बीमारी से पीड़ित रोगियों व ग़रीबों की स्वयं सेवा करती थीं। 1946 में गरीबों, असहायों, बीमारों और लाचारों के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। 1948 में स्वेच्छा से उन्होंने भारतीय नागरिकता ले ली थी।