प्रतिस्पर्धा की इस दौड़ में हम हमेशा रोजगार की तलाश में इधर से उधर भागते रहते हैं। एक बेहतर स्वास्थ्य और पैसा होने के बावजूद भी हम कभी-कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाते।

प्रतिस्पर्धा की इस दौड़ में हम हमेशा रोजगार की तलाश में इधर से उधर भागते रहते हैं। एक बेहतर स्वास्थ्य और पैसा होने के बावजूद भी हम कभी-कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाते।  जिसके चलते जो हम चाहते है अगर वो न हो तो हम बहुत जल्द निराश होकर हिम्मत भी हार जाते हैं। अगर आपकी भी कुछ ऐसी ही सोच है, अगर आप भी अपनी जिंदगी में हिम्मत हार चुके हैं तो ये ख़बर आपके लिए बेहद जरुरी है। तो चलिए आपको यूपी के देवरिया लिए चलते हैं जहां इस बदलते दौर में एक व्यक्ति ऐसा भी है। जो शारिरिक रुप से दिव्यांग होने के बावजूद भी हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

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जन्म से ही दिव्यांग रोहित के पास हौसले की कोई कमी नहीं है। ये उनके हौंसलों का ही नतीजा है कि उनकी कहानी आज एक मिसाल बन गई है। जो हजारों लोगों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। जन्मजात से दिव्यांग रोहित के दोनों हाथ नहीं है बावजूद इसके वो लगातार बुलंद हौंसलों के साथ हर दिन जिंदगी जीने की जद्दोजहद में लगा हुआ है। अपने हुनर के दम पर वह अपने  क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। हुनर भी ऐसा जो अच्छे-अच्छों को मात दे।

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देवरिया की बरियारपुर नगर पंचायत के रहने वाले रोहित विश्वकर्मा जन्म से ही दिव्यांग है। उनके दोनों हाथ नहीं है फिर भी अपने दैनिक जीवन से लेकर और सभी काम अपने पैरों से ही करते हैं। दिव्यांगता को मात देते हुए रोहित अपने पैरों से  इस तरीके से कंप्यूटर चलाते हैं कि देखने वाला भी हैरान रह जाए। जिसके चलते रोहित  कंप्यूटर टाइपिंग में माहिर लोगों को चैलेंज भी देते हैं। नौकरी पाने के लिए कंप्यूटर सिखना बेहद जरुरी है इसलिए रोहित ने बीए की पढ़ाई करने के बाद ट्रिपल सी में भी कंप्यूटर कोर्स कर इस मील के पत्थर को भी तोड़ने का काम किया।

रोहित की भी सामान्य लोगों की तरह बस यही इच्छा है कि वो भी जिंदगी में कुछ हासिल करना चाहता है। वो भी अपने परिवार को एक अच्छा जीवन देना चाहता है। रोहित  की  मां  भी बेटे के हुनर से काफी खुश हैं और सरकार से गुहार लगा रही हैं कि ऐसे होनहार बेटे को सरकार की तरफ से सहयोग मिलना चाहिए।

पिछले 15 वर्षों से लगातार यूपी सरकार के हर मुख्यमंत्री से मिलकर रोहित ने अपनी कहानी  और हालात  बता कर उन तक  अपनी समस्या पहुंचाई है। रोहित ने सरकार से अपने लिए नौकरी मांगने का भी प्रयास किया है। लेकिन रोहित को निराशा के सिवा कुछ भी नहीं मिला। हाल ही में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी रोहित ने मुलाकात की है। लेकिन इस बार भी रोहित को खाली हाथ ही लौटना पड़ा। बावजूद इसके रोहित आज भी मजबूत हौसलों के साथ इन मुश्किलों से जूझते रहे हैं। ये उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज वो अपने जीवन में इतना कुछ कर पाये हैं। बस अब उन्हें जरुरत है तो एक सहारे कि ताकि उनके हुनर को भी पंख मिल सकें।