मां वो आसमान है जिसके साये में बच्चा खुद को सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। लेकिन जब वही मां एक बच्चे से उसकी जिन्दगी छीनने की कोशिश करे तो मां शब्द का महत्व ही खत्म हो जाता है।

मां एक शब्द नहीं एक बच्चे के लिए उसकी दुनिया होती है। मां वो आसमान है जिसके साये में बच्चा खुद को सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। लेकिन जब वही मां एक बच्चे से उसकी जिन्दगी छीनने की कोशिश करे तो मां शब्द का महत्व ही खत्म हो जाता है। ताजा मामला यूपी के बांदा से है जहां एक मां ने अपनी दुधमुंही बच्ची को एक बैग में डाल कर मरने के लिए छोड़ दिया। बच्ची तो बच गई लेकिन मां की ममता का सरेआम कत्ल हो गया। जिसके चलते आज हमें ये कहना पड़ रहा है कि अगले जनम किसी को ऐसी मां न दीजो।

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क्या है पूरा मामला?

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कहने को एक बच्चे के लिए मां उसका सब कुछ होती है। लेकिन जब वही मां अपने बच्चे को मरने के लिए अकेला छोड़ दें। तब मां शब्द का अर्थ ही खत्म हो जाता है। ताजा मामला यूपी के बांदा का है जहां मां की ममता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जहां एक मां ने अपनी दुधमुंही नवजात बच्ची  को जन्म देने के बादसड़क किनारे फेंक दिया। मां ने उसे जन्म तो दे दिया लेकिन इस कड़ाके की ठंड में बच्ची को जिंदगी और मौत से लड़ने के सड़क पर ही छोड़ दिया। मां को जरा सा भी एहसास नहीं हुआ कि इस कड़ाके की सर्दी में जहां नौजवानों की हालत खराब हो जाती है। वहां उस दुधमुंही बच्ची का क्या हाल हुआ होगा जिसने ठीक से अब तक दुनिया भी नहीं देखी।

वहीं बच्ची के रोने की आवाज जब स्थानीय लोगों ने सुनी तब इन लोगों ने ये सूचना पुलिस को दी। जिसके बाद तुरंत मौके पर पीआरबी डायल 112 पुलिस वहां पहुंची और बच्ची की हालत को देखते हुए उन्होंने बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उस बच्ची का उपचार चल रहा है।

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एक मां जो 9 महीने तक एक बच्चे को अपनी कोख में ऱखती है। लेकिन 9 महीने के बाद वो बच्चा अगर एक बेटी के रूप में पैदा हो। तब वही जन्म देने वाली मां जो खुद एक औरत है वो उस बच्ची को सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देती है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना मात्र एक योजना बन कर ही रह गई है। जहां मां के कर्तव्यों और फर्ज को सलाम करने का मन करता है। तो वहीं इस कलयुगी मां के कृत्य को देख कर मां शब्द से भरोसा उठ सा गया है। जहां कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और बेटियों को बचाने के तमाम प्रयास किये जाते हैं। वहीं आज भी लोग बेटियों  के पैदा होने के बाद उनको सड़कों पर फेंक रहे हैं।

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बांदा में नवजात बच्चे को फेंकने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बांदा में मासूम नवजात बच्चे और भ्रूण लगातार सड़कों या अनजान जगहों पर मिल रहे हैं। जहां उनको मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। वहीं जनपद में लिंग परीक्षण और गर्भपात जैसी सूचनाएं भी बार-बार मिल रही हैं। इन मामलों पर कार्रवाई भी की जाती है। लेकिन फिर भी लोगों पर इसका कोई असर नहीं है।

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एक बार फिर से आज एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जहां डीएम आवास के बाहर से ममता को शर्मसार करते हुए कलयुगी मां अभी पैदा हुई बच्ची को फेंक कर चली गयी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को गंभीर हालत में उठाकर जिला अस्पताल में भर्ती तो करा दिया है। लेकिन बच्ची की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

जनपद में मासूम बच्चियों के पैदा होने के बाद आज भी कलयुगी माँ नवजात बच्चों को सड़कोंपर फेंक रहीं हैं। लेकिन यहां एक सवाल बार-बार जहन में आता है कि आखिर एक मां अपने ही बच्चे को मरने के लिए सड़कों पर कैसे फेंक सकती है। कोई मां इतनी निर्दयी कैसे हो सकती है कि अपने बच्चे से ही इस तरह मुंह मोड़ ले।