JNU प्रशासन ने अगले सेमेस्टर के लिए 1 जनवरी से 5 जनवरी तक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा की थी।

दिल्ली में स्थित जवाहर लाल यूनिवर्सिटी(JNU) में एक बार फिर हिंसा देखने को मिली। एक बार फिर जेएनयू कैंपस में हिंसा की आग भड़की। रात के अंधेरे में कुछ नकाबपोश हमलावरों ने जेएनयू कैंपस पर हमला बोल दिया। हाथों में रॉड लिए इन हमलावरों के सामने जो भी आया उस पर उन्होंने हमला करना शुरु कर दिया। जिसमें 2 दर्जन से अधिक छात्र घायल हो गए।

छात्रों की माने ये हमला रजिस्ट्रेशन को लेकर किया गया। पिछले कुछ दिनों से जेएनयू में ये मामला चल रहा था। JNU प्रशासन ने अगले सेमेस्टर के लिए 1 जनवरी से 5 जनवरी तक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा की थी। जिसमें छात्रों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है। लेकिन लेफ्ट समर्थित छात्र इसका लगातार विरोध कर रहे थे। जिसके चलते उन्होंने कक्षाओं का बहिष्कार भी किया था। हमले में घायल हुए छात्रों की माने तो जिन छात्रों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने की कोशिश की उनके वाईफाई कनेक्शन काट दिए गए। इसके अलावा जिन छात्रों ने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करने की कोशिश की उनके साथ मारपीट की गई।

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घंटों तक चला तांडव

नकाबपोश हमलावरों का ये तांडव घंटों तक चला। नकाबपोश हमलावरों ने साबरमत्ती हॉस्टल, साबरमत्ती टी-प्वाइंट सहित कई हॉस्टल में जमकर तोड़फोड़ की गई। हमलावरों ने छात्रों के अलावा अध्यापकों पर भी लोहे की रॉड से हमला किया। एक ओर जहां इसके बाद पुलिस प्रशासन लगातार सवालों के घेरे में है तो वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी उंगलियां उठ रही है और कहा ये जा रहा है कि इस पूरे प्रदर्शन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है।

हमले पर गरमाई सियासत

JNU हमले को लेकर राजनीति भी काफी गरमाई हुई है। जिसके बाद से कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी हो चुका है। जिसमें राहुल गांधी, मायावती से लेकर सभी बड़े नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। तो वहीं प्रियंका गांधी बीती रात ही हमले में घायल हुए छात्रों से मिलने एमस पहुंची। इसके अलावा पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हमलावर जब हॉस्टल में मौजूद थे तो कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने यूनिवर्सिटी का मैन गेट बंद कर पूरे कैंपस को घेर लिया था। बावजूद इसके पुलिस मूकदर्शक बनी सब देखती रही और नकाबपोश हमलावर हाथों में हथियार लहराते हुए पुलिस की आंखों के सामने से निकल गए।

जेएनयू में हुए इस हमले के बाद से देशभर में इस घटना का लगातार विरोध हो रहा है। एक बार फिर से केंद्र की मोदी सरकार और गृहमंत्री अमित शाह पर लगातार सवालों की बौछार हो रही है। भले ही गृहमंत्री अमित शाह ने इस हमले को लेकर उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हों। लेकिन इससे छात्रों और देश की जनता में पैदा हुई गुस्से की आग शांत होती नहीं दिख रही है।