लड्डू-गोपाल के जन्म से लेकर छठी तक ये त्यौहार बड़े हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

जन्माष्टमी का पर्व हिन्दू पंचाग के अनुसार, भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। हालांकि  हिंदू मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के पालनहार श्रीहरि विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस पर्व को धूमधाम से मनाने की तैयारी बड़े ज़ोर-शोर से चल रही है। जन्माष्टमी पर अगर बारिश न हो तो ये दिन अधूरा सा लगता है और बारिश की फुहारों ने इस दिन को और भी खूबसूरत बना दिया।

23 अगस्त और 24 अगस्त के बीच में फंस गया जन्माष्टमी-उत्सव

त्यौहार का असली आनंद तो सुहाने मौसम में ही होता है। वैसे भी श्री कृष्ण भगवान का जन्म भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र के दिन रात्री 12 बजे हुआ था जब बारिश ज़ोरों पर थी। ऐसे मान्यता है की इस दिन बारिश का होना शुभ होता है। भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र का संयोग होना भी शुभ माना गया है। रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि के साथ सूर्य और चंद्रमा ग्रह भी उच्च राशि में है।

23 अगस्त और 24 अगस्त के बीच में फंस गया जन्माष्टमी-उत्सव

रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी के साथ सूर्य और चंद्रमा उच्च भाव में होगा। रोहिणी नक्षत्र में इनकी पूजा करने से संतान प्राप्ति, आयु तथा समृद्धि में वृद्धि होती है। लड्डू-गोपाल के जन्म से लेकर छठी तक ये त्यौहार बड़े हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

23 अगस्त और 24 अगस्त के बीच में फंस गया जन्माष्टमी-उत्सव