रो रहा भारत रो रहा हिंदुस्तान, नम आंखों से कह रहा अलविदा सुषमा स्वराज..

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रो रहा भारत रो रहा हिंदुस्तान, नम आंखों से कह रहा अलविदा सुषमा स्वराज..

क्या खास क्या आम हर किसी ने नम आंखों से सुषमा स्वराज को अंतिम विदाई दी.

पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से 6 अगस्त मंगलवार निधन हो गया. सुषमा स्वराज के निधन की खबर से पूरा देश दुखी है. क्या खास क्या आम हर किसी ने नम आंखों से सुषमा स्वराज को अंतिम विदाई दी. देश की इस बेटी को यह देश हमेशा याद करेगा. उनके द्वार किए गए कामों के लिए हमेशा उनका कृतज्ञ रहेगा.

आईये आपको बतातें हैं सुषमा स्वराज की जिंदगी से जुड़ी बातें  

  1. 14 फरवरी 1952 को हरियाणा में जन्मी थी देश की यह बेटी. पिता का नाम हरदेव शर्मा और माता का नाम लक्ष्मी देवी था. सुषमा स्वराज का लाहौर से भी नहरा नाता रहा है. सुषमा स्वराज के माता-पिता पाकिस्तान के लाहौर के धर्मपुर से थे, बाद में हरियाणा में आकर बस गए. पाकिस्तान के अपने आखिरी दौरे में सुषमा स्वराज धर्मपुर भी गई थीं.
  2. एनसीसी से भी सुषमा स्वराज का गहरा नाता रहा है. जब सुषमा स्वराज अंबाला कैंट के एसडी कॉलेज में पढ़ा करती है. उस वक्त उन्हें लगातार तीन सालों तक एनसीसी के बेस्ट कैडेट का खिताब मिला.
  3. यह तो सब जानते हैं कि सुषमा स्वराज एक कुशल राजनेता होने के साथ-साथ एक प्रखर प्रवक्ता थीं. लेकिन सुषमा स्वराज के भाषणों में एक कवयित्री की झलक भी दिखती थी. सुषमा स्वराज को क्लासिकल म्यूजिक, कविताओं में बेहद दिलचस्पी थी. अक्सर अपने भाषणो में वह कविताएं पढ़ा करती थीं.
  4. सुषमा स्वराज के राजनीतिक सफर की बात करें तो 1970 में सुषमा स्वराज एबीवीपी में शामिल हुई थीं और यहीं से उनका सियासी सफर शुरू हुआ.
  5. 1973 में सुषमा स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की.
  6. सुषमा स्वराज ने 13 जुलाई 1975 को स्वराज कौशल के साथ शादी की थी. स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील के तौर पर काम कर रहे थे. दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में साथ-साथ काम किया. आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी दोनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. यहीं से दोनों की नजदीकियां बढ़ीं और आगे चलकर शादी करने का फैसला लिया. यह शादी आपताकाल के दौर में हुई थी.
  7. 1977 में जनता पार्टी की सरकार में 25 साल की सुषमा स्वराज सबसे युवा कैबिनेट मंत्री रहीं. 27 वर्ष की उम्र में हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं. किसी राजनीतिक पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता होने का गौरव भी सुषमा स्वराज के पास है. बीजेपी की पहली महिला मुख्यमंत्री, दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री, विपक्ष की पहली महिला महासचिव और पहली महिला विदेश मंत्री होने का गौरव का उनके पास है. एक तरह से नारी सशक्तिकरण की पहचान, नारी सशाक्तिकरण का सशक्त चेहरा थी सुषमा स्वराज
  8. सुषमा स्वराज संसद में एक शेरनी की तरह दहाड़ा करती थीं. उनकी वाकपटूता का हर कोई कायल था. जब वह बुलना शुरु करती थी हर कोई स्तब्ध रह जाता था. शेरों-शायरी और व्यंगात्मक श्रेणी में भाषण देने में सुषमा स्वराज माहिर थी. उनके यह भाषण विरोधियों को तीर की तरह चुभते थे, लेकिन एक मुस्कुराहट भी दे जाते थें. यही कारण था कि 2004 में सुषमा को आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंटेरियन अवार्ड से नवाजा गया था. वह पहली और इकलौती महिला सांसद हैं जिन्हें यह सम्मान मिला.