एनआरसी लिस्ट को लेकर भाजपा चारों तरफ से घिरी हुई नजर आ रही है।

कई विपक्षी पार्टी के नेता एनआरसी लिस्ट को लेकर बीजेपी का विरोध कर रहे हैं। एनआरसी लिस्ट को लेकर खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बैठक बुलाई।

जब से मोदी सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में आई है तब से यह सरकार कुछ न कुछ बड़ा करने में लगी हुई है। सबसे पहले तो इस सरकार ने तीन तलाक विधेयक पास कराया जिससे मुस्लिम महिलाओं में खुशी की लहर देखी गई। एक जश्न सा देखा गया बीजेपी दफ्तरों में।

लाखों लोग बने अपने देश में ही विदेशी, बीजेपी के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें...

फिर दूसरा एहतिहासिक कारनामा था राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को कश्मीर भेजना। जहां पर उन्होंने सेना के अधिकारियों के साथ मीटिंग की और वापस आते ही घाटी की सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दे दिया। सुरक्षा बढ़ने के कुछ दिन बाद ही कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया। जिसके चलते अलगाववादी नेता महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्लाह और खुद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसका पुरजोर विरोध किया।

जानकारी के लिए बता दें कि असम में एनआरसी की आखिरी लिस्ट जारी हो चुकी है जिसमें एक तरफ 3.11 करोड़ लोगों के नाम शामिल है तो वहीं 19 लाखों लाख लोगों के नाम इस लिस्ट से गायब है। एनआरसी लिस्ट को लेकर कई नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है इसमें ममता बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी जैसे बड़े दिग्गज नेता भी शामिल हैं।

भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी जेडीयू ने भी एनआरसी लिस्ट को लेकर अपनी नाराज़गी साफ तौर पर जाहिर कर दी है। जेडीयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने बयान देते हुए कहा है कि एनआरसी की अंतिम सूची ने लाखों लोगों को उनके अपने ही देश में विदेशी बना दिया है।