कोर्ट कुछ भी दे फैसला, सरकार के पास है अयोध्या को लेकर ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’…….

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सुब्रह्मण्यम स्वामी ने राम मंदिर मामले को लेकर दिया बड़ा बयान

अयोध्या विवाद एक राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक-धार्मिक विवाद है। जो नब्बे के दशक में सबसे ज्यादा उभार पर था। इस विवाद का मूल मुद्दा राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद की स्थिति को लेकर है। विवाद यह है कि क्या हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद बनाया गया या मंदिर को मस्जिद के रूप में बदल दिया गया।

दरअसल, अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला सुनाए, लेकिन सरकार के पास संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत राष्ट्रीयकरण का ब्रह्मास्त्र है।

अनुच्छेद 300-ए  के तहत केस में जीतने वाले को जमीन नहीं, मुआवजा देने का अधिकार है। अयोध्या की कुल 67.703 एकड़ जमीन में से सुप्रीम कोर्ट में केवल 0.313 एकड़ क्षेत्र ही विवादित है।

कोर्ट ने दिया था मध्यस्थता से रास्ता निकालने का आदेश

अयोध्या जमीन विवाद को सुलझाने के लिए पहले सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का रास्ता अपनाने का आदेश दिया था। लेकिन इस रास्ते के तहत बात नहीं बनी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त से इस मसले पर रोजाना सुनवाई करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई के तहत सप्ताह में तीन वर्किंग डे सुनवाई होती है।

राम मंदिर मसले की सुनवाई हफ्ते में मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को हो रही है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ कर रही है। इस पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं।