नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने भी सरकार के विरोध में दिया ये बड़ा बयान…

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एक और  नाम जुड़ा कश्मीर मुद्दे पर असहमत लोगों की लिस्ट में…

अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अगुआई में अचानक ही कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाये जाने पर लिए गए इस फैसले के बाद कश्मीर में कोई परेशानी न हो इसके लिए केंद्र सरकार ने पहले ही पूरे इंतज़ाम कर लिए थे। ये सारी स्थिति की देखते हुए सरकार ने घाटी में सुरक्षा और बढ़ा दी थी।

मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक कदम पर बीजेपी दफ्तर में काफी खुशी का माहौल था और साथ ही मिठाई भी बांटी गई। जहां कई देशों से मोदी के समर्थन में आवाज़ आयी वहीं अलगाववादी नेताओं और विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने मोदी सरकार के इस कदम की आलोचना की, विरोधियों के स्वर मुखर हुये। इसके अलावा पाकिस्तान ने भी इसके विरोध में बौखलाहट दिखाई। पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रहा है। इसके लिए वो कई देशों से मदद की गुहार भी लगा रहा है। यहाँ तक कि उसने अमरीका से समर्थन की अपील की लेकिन जब वहां भी इसकी दाल नहीं गली तो पाकिस्तान ने भारत को धमकियां देनी शुरू कर दी। जबकि पाकिस्तान के इसी रवैये की वजह से कई देशों में उसकी आलोचना भी हो रही है

  जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने पर नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने दिया बड़ा बयान...

और इस बार एक नया नाम सामने आया है ‘नोबल पुरस्कार विजेता और अर्थ-शास्त्री अमर्त्य सेन’ जो जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के तरीके से सहमत नहीं हैं। सेन ने कहा कि उनको नहीं लगता है कि कश्मीर में लोकतंत्र के बिना कोई समाधान हो सकता है।

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के तरीके से नोबल पुरस्कार विजेता और अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन भी सहमत नहीं हैं। सेन ने कहा कि उनको नहीं लगता है कि कश्मीर में लोकतंत्र के बिना कोई समाधान हो सकता है।

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जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले पर अर्थशास्त्री ने कहा कि सरकार के फैसले में कई कमियां हैं। उन्होंने कहा कि एक भारतीय के तौर उन्हें इस बात का गर्व नहीं है। भारत ने दुनिया के लोकतांत्रिक देशों में जगह बनाने के लिए काफी कुछ किया था। भारत गैर-पश्चिमी देशों के बाद पहला देश था जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू की गई, लेकिन अब जो सरकार ने कदम उठाया है, उससे देश की छवि को नुकसान पहुंचा है।

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने पर नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने दिया बड़ा बयान...

जम्मू-कश्मीर में स्थानीय नेताओं को नजरबंद किए जाने के सरकार के फैसले पर अमर्त्य सेन कहा है कि ‘मुझे नहीं लगता है कि बिना लोगो की बात सुने निष्पक्ष न्याय हो सकता है। यदि आप नेताओं, जिन्होंने नेतृत्व किया, बीते समय में सरकारों का गठन किया, उन्हें नजरबंद रखेंगे और जेल में डालेंगे तो इस तरह आप लोकतंत्र के चैनल को अवरुद्ध करने का काम कर रहे हैं। सेन ने कहा कि यह कुछ ऐसा है जिसमें कश्मीरियों का एक अपना दृष्टिकोण है क्योंकि यह उनकी ज़मीन है।

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