कोटा में बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। दिसंबर में जहां अस्पताल में 100 बच्चों ने दम तोड़ दिया था। तो वहीं साल के पहले दो दिन में 4 और बच्चों की मौत हो गई है।

नए साल के आगाज के साथ ही जहां पूरा देश खुशी से झुम रहा था। तो वहीं राजस्थान के कोटा में कई घरों में मातम पसरा हुआ था। कोटा में बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। दिसंबर में जहां अस्पताल में 100 बच्चों ने दम तोड़ दिया था। तो वहीं साल के पहले दो दिन में 4 और बच्चों की मौत हो गई है। जिसके चलते साल के पहले ही दिन 3 और बच्चों ने दम तोड़ दिया। तो वहीं गुरुवार को जिंदगी और मौत से जुझ रहे एक और बच्चे ने दम तोड़ दिया। जिसके बाद अब बच्चों की मौत का आंकड़ा 104 पर पहुंचा।

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104 बच्चों की मौत के बाद अब जाकर प्रशासन और सरकार की आंख खुली है। जिसके चलते मामले की जांच के लिए केंद्र की एक हाईलेवल टीम आज कोटा पहुंचेगी। इसके अलावा स्वास्थय मंत्री रघु शर्मा भी आज कोटा पहुंच रहे हैं। कोटा में बच्चों की मौत का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी हजारों बच्चे अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे है। बावजूद इसके सरकार और प्रशासन इस पर संज्ञान लेने के मुड़ में बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा है।

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कोटा में 2014 में भी अस्पताल में 15719 बच्चे भर्ती हुए थे। जिसमें से 1198 बच्चों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसके अलावा 2015 में 17579 बच्चों को भर्ती करवाया गया था। लेकिन यहां भी 1260 बच्चों को बचाया नहीं जा सका। तो वहीं साल 2019-20 में ये सिलसिला अब जारी हुआ है और ये कहां जाकर रुकेगा पता नहीं। अब ऐसे में इसे अस्पताल प्रशासन की लापरवाही कहें या सरकार का ढीलढाल रवैया जिसके चलते इतना सब हो जाने के बाद भी इसको लेकर अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।