नवंबर महीने में वहां सबसे ज्‍यादा किसानों ने आत्‍महत्‍या की है। महाराष्ट्र चुनाव का परिणाम आया और दूसरी तरफ राज्य में एक ही माह में 300 किसानों ने आत्महत्या कर ली।

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव परिणाम पर सभी की आंखे टिकी थी। सभी कयास लगा रहे थे कि इस बार किसकी सरकार बनेगी और कौन नेता सत्ता की कुर्सी पर बैठेगा। इस बीच किसी की भी नजर किसानों की दशा पर नहीं गई। किसी ने नहीं सोचा की भारी बारिश के चलते किसान कितना परेशान है। इसी बीच चुनाव का परिणाम आया और दूसरी तरफ राज्य में एक ही माह में 300 किसानों ने आत्महत्या कर ली।

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अगर बात करें बीते गत वर्षों कि तो 2015 में कई बार एक महीने में किसानों की आत्‍महत्‍या का आंकड़ा 300 के भी पार हो गया है। अगर बात करें मराठवाड़ा इलाके कि तो नवंबर महीने में वहां सबसे ज्‍यादा किसानों ने आत्‍महत्‍या की है। बतादें कि किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा 120 मामलें और विदर्भ में 112 मामले दर्ज किए गए। कार्यकर्ता विजय जवाधिया ने किसानों की आत्महत्या के बारे में बोलते हुए कहा कि खेती में आने वाले खर्च और मजदूरी काफी बढ़ गई है।

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इस वजह से किसान बारिश का मौसम बर्दाश्‍त नहीं कर सके हैं। किसानों को उनके उत्‍पाद का और ज्‍यादा पैसा मिलना चाहिए। महाराष्ट्र में हाल ही में सीएम उध्दव ठाकरे की सरकार बनी है और बनी गठबंधन की सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच अभी भी विभागों के बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है। अभी तक विभागों के आवंटन की घोषणा भी नहीं की गई है।