अब  किसान और क्या चाहते हैं? एक नजर डालिए…

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार जारी है. दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए किसानों को कुल नौ दिन हो गए हैं और इस बीच दो बार केंद्र सरकार के साथ चर्चा हुई है. लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है. किसान कृषि कानून वापस लेने की मांग पर अड़े हैं, MSP को लेकर किसान ठोस भरोसा चाहते हैं. जबकि, सरकार कानूनों को वापस लेने की बात तो नहीं मान रही है लेकिन किसानों की कुछ ऐसी मांग हैं जिनपर सरकार राजी होती दिख रही है. ऐसे में आखिरकार सरकार और किसानों के बीच किन मुद्दों पर सहमति बनती दिख रही है और किसानों की मांग क्या है, एक नज़र डालिए…

सरकार और किसानों की बातचीत में क्या हुआ?

गुरुवार को करीब सात घंटे की चर्चा के दौरान किसानों और सरकार के बीच काफी मुद्दों पर सहमति दिखी और कुछ मुद्दों पर किसान अड़े रहे. किसानों ने लिखित में अपनी आपत्तियां दी थीं, जिसके बाद केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों में 8 मुद्दों पर संशोधन हेतु विचार करने का प्रस्ताव रखा, जिसे किसान नेताओं ने ठुकरा दिया. हालांकि, चर्चा खत्म होते-होते कुछ ऐसे मसले रहे जिनपर सरकार का रुख नरम हुआ. MSP को लेकर किसानों की चिंता सबसे अधिक है, ऐसे में सरकार इसपर भरोसा दे रही है कि नए कानून से MSP पर कोई असर नहीं पड़ेगा. सरकार MSP को सशक्त करते हुए कुछ और फसलों को इसमें जोड़ सकती है. APMC सिस्टम को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा. मौजूदा तरीके से जैसे मंडी सिस्टम चल रहा है, वो जारी रहेगा और बाहरी मंडी का सिर्फ ऑप्शन होगा.

प्राइवेट मंडी को कानून के दायरे में लाया जा सकता है. अभी सिर्फ SDM और ट्रिब्यूनल तक की इजाजत है, लेकिन किसानों ने इस मसले को सिविल कोर्ट तक ले जाने की बात कही है. जिसपर विचार संभव है. अगर व्यापारी प्राइवेट मंडी में आता है, तो रजिस्ट्रेशन सुविधा होनी चाहिए. अब सिर्फ पैन कार्ड से काम नहीं चलना चाहिए, किसानों के अपील पर सरकार विचार कर सकती है. दरअसल, किसानों का कहना है कि MSP पर अगर सरकार भरोसा दे रही है तो उसे लिखित में कानून में शामिल कर दे. अब साथ ही मंडी सिस्टम को लेकर डर ये भी है कि अभी आढ़तीए किसानों के साथ हर तरह का व्यवहार करते हैं, लेकिन वही संबंध किसी व्यापारी के साथ नहीं हो सकेगा. ऐसे में किसानों की मांग है कि उनकी शंकाओं को दूर किया जाए, कानून में मुद्दों को शामिल किया जाए वरना कानून ही वापस ले लिया जाएं.

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