रामपुर में अनुराग शर्मा हत्याकांड मामले में चार आरोपी हुए गिरफ्तार

मृतक के पुराने दुश्मनों को इकट्ठा कर रची गई साजिश, पुलिस ने सुलझायी साजिश की पूरी गुत्थी

यूपी के रामपुर में पिछले सप्ताह 20-05-2020 को ज्वालानगर थाना सिविल लाइन में किसी अज्ञात मोटर साईकिल पर सवार बदमाशों ने पूर्व शिवसेना प्रमुख अनुराग शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस सम्बधं में मृतक की पत्नी श्रीमती शालिनी शर्मा ने थाना सिविल लाइन, रामपुर में तहरीर दी थी। इस हत्या मामले में एक नया खुलासा हुआ है अनुराग शर्मा हत्या मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि एसओजी और थाना सिविल लाइन, रामपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी छत्रपाल सिंह और पवन को उसके घर से और बाबू उर्फ हिमांशु और राजकिशोर को फोटो चुंगी से गिरफ्तार किया गया। वहीं छत्रपाल सिंह के घर से हत्या में उपयोग की गयी एक 32 बोर का पिस्टल, 05 जिन्दा कारतूस, 02 315 बोर के तमंचे, 04 315 बोर के जिन्दा कारतूस, 02 खोखा 315 बोर के कारतसू और एक मोटर साईकिल सीटी-100 बरामद हुई है। गिरफ्तार किये गये चार आरोपियों में पहला बाबू उर्फ हिमांशु निवासी गड्डा कालौनी ज्वालानगर, थाना सिविल लाइन, रामपुर दूसरा राजकिशोर उर्फ दुरिया निवासी नूर महल कालौनी थाना सिविल लाइन रामपुर तीसरा छत्रपाल सिंह निवासी दुर्गा कॉलोनी आगापुर रोड ज्वालानगर थाना सिविल लाइन, रामपुर और चौथा आरोपी पवन निवासी दुर्गा कॉलोनी आगापुर रोड ज्वालानगर थाना सिविल लाइन, रामपुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा किया जिसमें कई चौंकाने वाले मामले सामने आए।

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गिरफ्तार आरोपी बाबू उर्फ हिमाशु से पूछताछ पर पता चला कि साल 2011 में उसके पिता हेमेन्द्र की हत्या सुनील निवासी बारादरी जनपद-बरेली ने की थी। सुनील उसके मौहल्ले के अनुराग शर्मा के साथ रहता था। उसके पिता की हत्या में सुनील जेल गया था। जिसके बाद हिमांशु की मां पर अनुराग शर्मा ने दबाव बनाकर  फैसला करा लिया था। फैसला इस बात पर हुआ था कि सुनील रामपुर में नहीं रहेगा, लेकिन सुनील जेल से आने के बाद अनुराग शर्मा के घर पर ही रहने लगा और उसके साथ काम करने लगा। मोहल्ले के लोग आये दिन हिमांशु को ताने देते रहते थे कि तेरे बाप का हत्यारा खुले आम घूम रहा है। जिस पर हिमांशु ने बताया कि मुझे ये भी शक था कि मेरे पिता की हत्या अनुराग ने ही करायी है इसीलिये सुनील अनुराग के साथ रहता है। तभी से मैं अन्दर ही अन्दर अनुराग शर्मा के प्रतिकाफी द्वेशभावना रखता था और मेरा अनुराग शर्मा के घर आना जाना भी था। मैं कई बार अनुराग शर्मा के साथ मोहल्ले के रहने वाले छत्रपाल सिंह के घर भी गया था। छत्रपाल सिंह भी अक्सर मुझे अपने बाप का बदला लेने के लिए उकसाता रहता था। छत्रपाल सिंह ने मुझसे कहा कि अनुराग शर्मा की महीने की काफी कमाई होती है। यदि अनुराग शर्मा को रास्ते से हटा दिया जाये तो यो सारा पैसा हम दोनों कमायेगें और आपस में बांट लेगें। छत्रपाल ने अनुराग शर्मा को मारने के लिए एक व्यक्ति दिया जो अनुराग का दुश्मन था और भी हथियार भी मुहैया कराये और हिमांशु को जेल जाने से भी बचाने का भी भरोसा दिलाया।

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जिसके बाद 20-05-2020 को दोपहर करीब 03:00 बजे राजकिशोर उर्फ दुरिया हिमांशु के पास पहुंचा तो उसने कहा कि मुझे छत्रपाल सिंह ने अनुराग शर्मा की हत्या के सम्बंध में भेजा है। तब वो और राजकिशोर उर्फ दुरिया रूद्रपुर से एक मोटर साईकिल पर रामपुर आ गये। ये दोनों सीधे छत्रपाल सिंह के घर गये वहां पर छत्रपाल सिंह का भाई पवन मिला, पवन ने एक थैले में दो तमंचें 315 बोर के और कुछ कारतूस, एक सीटी-100 मोटर साईकिल दी और पवन ने ही उन्हें बताया कि आप लोग मेन रोड पर जाकर खड़ हो जाओ कुछ ही देर में अनुराग शर्मा स्कूटी से अकेला आयेगा तभी मारना है। अनुराग शर्मा के आने पर दोनों ने उसका पीछा किया गया औऱ आगापुर रोड पर सुनसान जगह पर उसको पहले राजकिशोर ने गोली मारी जिससे वो गिरगया।  फिर हिमांशु ने गोली मारी। 06-07 राउंड फायर किये गये फिर आरोपी वहां से सीधे छत्रपाल सिंह के घर पहुंचे वहां पर छत्रपाल सिंह और उसके भाई पवन दोनों आरोपियों को सीधा रूद्रपुर छोड़ दिया। अनुराग शर्मा की हत्या हिमांशु ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए की लेकिन दूसरे आरोपी राजकिशोर उर्फ दुरिया ने पूछताछ में बताया गया कि साल 2008 में अनुराग शर्मा ने उसके भाई जैसे दोस्त चोखे यादव हत्या अपने साथियों से करा दी थी।

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जिसके बाद से ही वो अनुराग शर्मा से बदला लेने के चक्कर में था। बदला लेने के लिए उसने साल 2009 में भी अनुराग शर्मा पर गोली चलायी थी। गोली अनुराग शर्मा के सिर में लगी थी, लेकिन वो बच गया था। इस घटना में वो और उसका दोस्त तरनजीत सिंह उर्फ मनी जेल गये थे।वहीं तीसरे गिरफ्तार आरोपी छत्रपाल ने पूछताछ में बताया गया कि मैने कुछ समय पहले एमएनसी नाम की एक कम्पनी खोली थी जिसमें लोगों से पैसे जमा करके उन्हें इन्वेस्ट किया जाता था। पहले तो काम ठीक चला मैने लोगों को मुनाफा भी दिया लेकिन बाद में कम्पनी को घाटा होने लगा। लोगों के पैसे भी नही दे पाया लोगों ने अपने पैसे लेने का दबाव बनाया और मेरे खिलाफ मुकदमें लिखा दिये जिनमें वो जेल भी गया। जेल से वापस आने के बाद अपनी माली हालत सुधारने के लिए उसने अपना घर भी गिरवी रख दिया था। बाद में अनुराग शर्मा से दोस्ती हुई और उसकी पत्नी के जेवरात उधार लेकर अपने भांजे की शादी में छत्रपाल ने दे दिये । लोग पैसे वापसी का दबाव बनाने लगे और अनुराग भी अब अपनी पत्नी के जेवर वापस मांग रहा था। जिसके बाद अनुराग को रास्ते से हटाने के लिए उसने हिमांशु को भड़काया और फिर घटना को अंजाम दिया गया। चौथे गिरफ्तार आरोपी  पवन ने पूछताछ में अपने सगे भाई छत्रपाल के द्वारा बताये गयी बातों के अनुसार उसके साथ मिलकर अनुराग शर्मा की षडयन्त्र के तहत हत्या करने में अपनी बराबर की भूमिका बतायी।

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बता दें कि छत्रपाल सिंह के घर से हत्या में उपयोग किये गये 02 तमचें 315 बोर के, 04 कारतूस जिन्दा 315 बोर के, 02 खोखा कारतसू 315 बोर के और एक मोटर साईकल सीटी-100 बरामद हुई। इसके अतिरिक्त छत्रपाल के घर से उसके द्वारा बतायी गयी झूठी फायरिंग में प्रयुक्त एक नायजायज पिस्टल 32 बोर की औऱ 05 कारतूस जिन्दा 32 बोर के बरामद हुये। इस हत्याकांड को समझने के लिए इसके पिछले इतिहास को जानना ज़रूरी था भाजपा नेता और ज़िला पंचायत सदस्य पति छत्रपाल यादव ने जुर्म की दुनिया का नया बादशाह बनने के लिए और अनुराग शर्मा के साम्राज्य पर कब्ज़ा जमाने के लिए अनुराग शर्मा के पुराने दुशमनों को इकट्ठा कर हत्या को अंजाम दिया गया। मृतक शिवसेना नेता अनुराग शर्मा पर भी 30 मुकदमे दर्ज थे वो जुर्म की दुनिया का रामपुर का बादशाह था। खुलासा करने वाली एस ओ जी  प्रभारी बीरेंद्र सिंह की टीम को 20 हज़ार रुपए इनाम की घोषणा खुद एस पी ने की है।

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