अगले 3-4 महीने तक दिल्ली में डेरा डालेंगे किसान?

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बीच का रास्ता तलाश रही है सरकार?

किसानों और सरकार के बीच तकरार खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आज किसानों के आंदोलन का 14वां दिन है। इस बीच किसानों और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है लेकिन किसान और सरकार फिलहाल किसी नतीजे पर पहुंचते नजर नहीं आ रहे हैं। किसान अपनी आवाज बुलंद करने के लिए तमाम कोशिशें भी कर रहे हैं। पहले किसान सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अलग अलग राज्यों से दिल्ली बॉर्डर पर इकट्ठा हुए लेकिन जब किसानों के दिल्ली बॉर्डर पर जमा होने के बाद भी सरकार और किसानों के बीच चल रही बातचीत किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंची तो किसानों ने भारत बंद भी किया। लेकिन अभी भी किसान और सरकार किसी नतीजे पर पहुंचते नहीं दिख रहे हैं।

किसानों के प्रदर्शन के बाद सरकार बैकफुट पर जरूर है लेकिन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने पर सरकार राजी होती नहीं दिख रही है। दरअसल मंगलवार को किसानों के भारत बंद के बाद गृहमंत्री अमित शाह की किसानों के साथ आधी रात तक बैठक भी चली। जिसमें अमित शाह ने कहा कि सरकार कृषि कानूनों में जो भी संशोधन करेगी वो किसानों को लिखित में दिए जाएंगे। जिसके बाद किसानों और सरकार के बीच आज होने वाली बातचीत रद्द हो गई है। लेकिन यहां पर बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या किसान लिखित में आश्वासन मिलने के बाद मान जाएंगे। अगर देखा जाए तो इसकी उम्मीद कम ही है क्योंकि इससे पहले भी जब सरकार ने किसानों के सामने कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा था तो किसानों ने उसे ठुकरा दिया था। किसानों ने कहा था कि वे चाहते हैं कि सरकार तीनों कानूनों को वापस ले। वहीं दूसरी तरफ सरकार तीनों कानूनों को वापस लेने के मूड में नजर नहीं आ रही है।

सरकार लगातार ये तर्क दे रही है कि तीनों कृषि कानून किसानों के हित में हैं। हालांकि किसानों के प्रदर्शन और विपक्ष के दबाव के बाद सरकार कानूनों में संशोधन के लिए तैयार जरूर हो गई है लेकिन किसान मानेंगे इसकी उम्मीद कम ही है। ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या किसान अगले 3 से 4 महीनों तक दिल्ली बॉर्डर पर ही डेरा डालेंगे। किसानों की तैयारियां तो कुछ इस ओर ही इशारा कर रही हैं। किसान 3-4 महीने का राशन लेकर आए हैं और इस बार सरकार से आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं। लेकिन अगर किसान 3-4 महीने दिल्ली बॉर्डर पर डेरा डालते हैं तो सरकार की टेंशन जरूर बढ़ेगी और साथ ही दफ्तर जाने वाले लोगों को भी यातायात की परेशानी से दो-चार होना पड़ेगा। ऐसे में उम्मीद तो यही करेंगे कि सरकार और किसानों के बीच बातचीत किसी निष्कर्ष तक पहुंचेगी और किसान संतुष्ट होकर अपने घरों को लौटेंगे।

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