सरकार और किसानों के बीच आठवें दौर की वार्ता आज

सरकार और किसानों के बीच चल रही रस्साकसी थमती नजर नहीं आ रही है। इस रस्साकसी के बीच आज आठवें दौर की बातचीत होनी है। सरकार और किसान दोनों ही हठधर्मिता छोड़ने का नाम नहीं ले रहे। दिल्ली में कड़ाके के ठंड के बीच किसान अपना आंदोलन खत्म करने का नाम नहीं ले रहे तो सरकार की मंशा से भी ये जगजाहिर हो चुका है कि सरकार कृषि कानून वापस लेने के मूड में नहीं है। इन सबके बीच किसान शक्ति प्रदर्शन करके सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराने की कोशिश भी कर रहे हैं। लेकिन फिलहाल कोई रास्ता दिखता नजर नहीं आ रहा। मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में 8 जनवरी यानि आज फैसला ना सुनाने की अपील की थी।

Delhi में मौसम का बदला-बदला मिजाज

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की बात तो मान ली है लेकिन क्या किसानों और सरकार के बीच आज होने वाली आठवें दौर की बातचीत के बाद कोई समाधान निकलेगा, दोनों पक्षों के तेवर देखकर तो इसके आसार कम ही नजर आ रहे हैं। हालांकि सरकार लगातार अपनी ओर से सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रही है। यही वजह कै कि आज होने वाली बातचीत में सरकार किसान संगठनों के साथ एमएसपी पर बातचीत के लिए प्रस्ताव रखेगी। किसान संगठनों ने गुरूवार को ट्रैक्टर रैली के जरिए सरकार को अपनी ताकत का अहसास दिलाने की कोशिश की। ट्रैक्टर रैली के जरिए किसानों ने जता दिया कि वे तीनों कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी पर गारंटी कानून से कम किसी भी बात पर नहीं मानने वाले वहीं दूसरी ओर सरकार भी साफ कर चुकी है कि वे कानून तो वापस नहीं लेंगे। अगर किसान चाहते हैं तो सरकार कृषि कानूनों से जुड़े एक-एक प्रावधान पर किसानों के साथ बातचीत कर सकती है

सुप्रीम फैसले से पहले अहम है आज की बातचीत

सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कोई भी फैसला सुनाए। इससे पहले आज का दिन काफी अहम है, क्योंकि एक और सरकार ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वो हर मसले पर बातचीत के लिए तैयार है जबकि किसान संगठन बातचीत से समाधान के लिए तैयार नहीं है। आपको याद दिला दें कि सुप्रीम कोर्ट भी लगातार बातचीत के जरिए समस्या के समाधान निकालने की बात कह रहा है

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