अजय देवगन फिल्म में सैयद अब्दुल रहीम का रोल निभाते दिखेंगे। सैयद अब्दुल रहीम को मॉर्डन इंडियन फुटबॉल का आर्किटेक्ट भी कहा जाता था।

बॉलीवुड में कई दिग्गज अभिनेता स्पोर्ट्स पर आधारित फिल्मों में नजर आ चुके हैं। शाहरुख खान से लेकर इमरान हाशमी तक सभी खेलों पर आधारित फिल्में कर चुके हैं। अब अजय देवगन भी ऐसी ही एक फिल्म में दिखाई देंगे। खबर है कि अजय देवगन स्पोर्ट्स कोच की भूमिका में नजर आयेंगे, जैसे शाहरुख खान चक दें इंडिया में स्पोर्ट्स कोच की भूमिका में थे। ये फिल्म अगले साल रिलीज होगी। चलिए हम आपको सैयद अब्दुल रहीम के बारे में बताते हैं।

अजय देवगन फिल्म में सैयद अब्दुल रहीम का रोल निभाते दिखेंगे।अजय देवगन फिल्म में सैयद अब्दुल रहीम का रोल निभाते दिखेंगे। सैयद अब्दुल रहीम को मॉर्डन इंडियन फुटबॉल का आर्किटेक्ट भी कहा जाता था। उनका जन्म साल 1909 में हैदराबाद में हुआ था। सैयद अब्दुल रहीम को साल 1950 में भारतीय फुटबॉल टीम का हेड कोच बनाया गया था। वहीं 1951 में सैयद ने एशियन गेम्स में भारतीय फुटबॉल टीम को गोल्ड दिलवाने में मदद की। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये वो दौर था जब भारतीय फुटबॉल टीम नंगे पैर खेलती थी। 1952 में हेलिंस्की ओलंपिक्स में सर्द हालातों के चलते भारत को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन ये आखिरी बार था जब भारतीय फुटबॉल टीम नंगे पैर मैदान में थी।

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अजय देवगन फिल्म में सैयद अब्दुल रहीम का रोल निभाते दिखेंगे।

इसके कुछ सालों बात तक भारतीय फुटबॉल टीम ने कई इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स जीते। लेकिन 1956 में भारत ने सबको चौंका दिया। मेलबर्न ओलंपिक्स में भारत की परफॉर्मेंस से हर कोई हैरान था। भारत ने उस वक्त क्वार्टर फाइनल में आस्ट्रेलिया को मात देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। हालांकि बाद में सेमीफाइनल में भारत युगोस्लाविया से हार गया था लेकिन उस दौर को आज भी याद किया जाता है।

अजय देवगन फिल्म में सैयद अब्दुल रहीम का रोल निभाते दिखेंगे।

मेलबर्न आलंपिक्स के छह सालों बाद भारतीय फुटबॉल टीम जकार्ता एशियन गेम्स के फाइनल में थी। भारतीय टीम को जकार्ता एशियन गेम्स के फाइनल में जाने के पीछे सैयद अब्दुल रहीम का हाथ था। लेकिन ये टूर्नामेंट उनके करियर का अखिरी टूर्नामेंट भी था। क्योंकि उन्हें इस दौरान कैंसर हो गया और सेहत बिगड़ने की वजह से उन्हें एशियन गेम्स में अच्छा प्रदर्शन करने के दो महिने बाद कोच पद से हटना पड़ा। भारतीय फुटबॉल में साल 1950 से 1960 का दौर हमेशा याद किया जाता रहा है क्योंकि ये दौर काफी सफल था। 1963 में सैयद अब्दुल रहीम की मौत हो गई लेकिन जो उन्होंने भारतीय फुटबॉल टीम के लिए किया वो हमेशा याद किया जाता रहा है। वो एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें भूल पाना मुश्किल है।

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