DRDO की तकनीक से दुश्मनो के उड़ेंगे होश

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नई दिल्ली : रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO ने सोमवार को बड़ी कामयाबी हांसिल की है। DRDO ने सोमवार को स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम का प्रयोग करते हुए हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।

सोमवार को इसकी जानकारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीटर के माध्यम से देते हुए कहा कि डीआरडीओ प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। वैज्ञानिको रक्षा मंत्री ने उनके इस उपलब्धि पर बधाई भी दी।

क्या है इपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल 
भारत में हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी का सबसे पहला परीक्षण 2019 में किया गया था। जिसका इस्तेमाल हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने और काफी कम खर्च में सैटेलाइन लॉन्च करने में किया जाएगा। इतना ही नहीं हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के लिए यान के तौर पर भी इसका प्रयोग किया जाएगा।

हाइपरसोनिक टेक्नोलजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली विकसित करने संबंधी भारत के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का हिस्सा है। भारत उन कुछ चुनिंदा देशों की श्रेणी में आ खड़ा हुआ है, जहां इस तकनीक का प्रयोग किया जाता है। अभी तक ये तकनींक अमेरिका, रूस और चीन के पास थी।