हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है, लोकसभा चुनावों में क्लीन स्वीप करने वाली भारतीय जनता पार्टी इस बार के विधानसभा चुनावों में 75 पार के लक्ष्य के साथ उतर रही हैं।

हरियाणा में 21 अक्टूबर को होगा चुनावी रण

लोकसभा चुनावों के बाद अब विधानसभा चुनावों का दौर आ गया है। महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है। आज बात हरियाणा के चुनावी घमासान की करेंगे। इस बार के चुनावी रण में पुरानी पार्टियों के साथ कुछ नए चेहरे और पार्टियां चुनावी मैदान में उतरने जा रही है। लोकसभा चुनावों में क्लीन स्वीप करने वाली भारतीय जनता पार्टी इस बार के विधानसभा चुनावों में 75 पार के लक्ष्य के साथ उतर रही हैं। तो वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई सत्ता को वापस लाने की जद्दोजहद में लगी हुई है।

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टिकटों को लेकर शुरु हुई आपसी खिंचतान

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लोकसभा चुनावों के बाद अब विधानसभा चुनावों की बारी है। भारी बहुमत के साथ लोकसभा चुनावों में जीत हासिल करने वाली बीजेपी विधानसभा चुनावों में भी अपना परचम लहराने की तैयारी में है। इसके अलावा कांग्रेस और अन्य पार्टियां भी चुनाव जीतने के लिए पूरी जोर आजमाइश में लगी हुई है। इस बार के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के पास जहां सत्ता बचाने की चुनौती है तो वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई सत्ता को हासिल करने में लगी हुई है। तो वहीं सबसे मजबूत क्षेत्रीय पार्टी आईएनएलडी यानि इंडियन नेशनल लोकदल और जननायक जनता पार्टी अलगाव के दौर से गुजर रही है। तो वहीं आम आदमी पार्टी और स्वराज इंडिया भी इस बार के चुनावी रण में अपनी किस्मत अजमाने उतर रहे हैं।

1.28 करोड़ मतदाता वाले इस राज्य में 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने है। बात अगर इस बार के चुनावी समीकरण की करें तो विधानसभा की 90 सीटों में से 73 सीटें सामान्य वर्ग के लिए है.. जबकि इस बार 17 सीटें आरक्षित है। तो ऐसे में चुनावों में जातिवाद की राजनीति भी देखी जा सकती है।

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इस बार के चुनावी घमासान में कौन मारेगा बाजी?

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इस बार के चुनावों में मायावती की बीएसपी भी सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। जो पहले जेजेपी यानि जननायक जनता पार्टी के साथ चुनाव लड़ने जा रही थी। लेकिन अब वह सभी 90 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगी। तो ऐसे में विधानसभा चुनावों में बीएसपी भी चुनावी खेल बिगाड़ सकती है। इसके अलावा अलगाव के दौर से गुजर रही जेजेपी और आईएनएलडी की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही।

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तो वहीं आम आदमी पार्टी और स्वराज इंडिया भी इस बार चुनावी मैदान में है। बात अगर सत्तारुढ़ बीजेपी और कांग्रेस की करें दोनों पार्टियों में अंदरखाने में रार मची हुई है। कांग्रेस के दिग्गज नेता भुपेंद्र सिंह हुड्डा और अशोक पंवर के बीच अनबन की खबरों के बाद बीजेपी नेताओं के बीच भी असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। बीजेपी में टिकट पर मची रार की जड़ में है केंद्रीय मंत्री और गुरुग्राम सांसद राव इंद्रजीत सिंह का बेटी को टिकट दिलाने की जिद पर अड़ जाना। अब पार्टी के गुरुग्राम विधायक उमेश अग्रवाल भी खुलेआम उनके समर्थन में खड़े हो गए हैं। गुरुग्राम विधायक उमेश अग्रवाल ने तो पार्टी को नसीहत देते हुए कहा है कि राव इंद्रजीत सिंह की अनदेखी पार्टी को भारी पड़ेगी। जिसके चलते पार्टी को  दक्षिण हरियाणा में भारी नुकसान हो सकता है।

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तो इस बार के चुनावों में सभी पार्टियों में आपसी रंजिश देखने को मिल रही है। बात चाहे बीजेपी की हो या फिर कांग्रेस की या फिर क्षेत्रीय पार्टी आईएनएलडी की सभी पार्टियों में आपसी विरोध के स्वर उठने लगे है। जिसका नतीजा विधानसभा चुनावों के परिणामों पर भी पड़ सकता है।

हरियाणा में चुनावी महौल की अगर बात करें तो हरियाणा का ट्रैंड बताता है कि जिसने लोकसभा चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है विधानसभा चुनावों में भी जीत उसकी ही हुई है। तो ऐसे में इस बार बीजेपी की सत्ता पर फिर से वापसी होते दिख रही है। बात अगर हरियाणा में कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास की करें तो पंजाब से 1966 में अलग हुए हरियाणा में कांग्रेस पार्टी को शुरुआती तीन विधानसभा चुनावों में जीत मिली थी। 1967,1968, 1972, 1977 में आपातकाल के बाद पार्टी ने 83 में से 3 सीटे ही जीत पाई थी। 38 उम्मीदवारों की जमानत ही जब्त हो गई थी। इस चुनाव में जनता पार्टी ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

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इसके बाद 1982 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 90 में से 36 सीटें जीती थी। इस चुनाव में बीजेपी ने लोकदल के साथ चुनाव लड़ा था। जिसमें बीजेपी को 6 और लोकदल को 31 सीटें मिली थी। इसके बाद 2004 से 2014 तक हरियाणा में कांग्रेस सत्ता में रही। बात अगर बीजेपी की करें तो बीजेपी ने 1991 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था। जिसमें पार्टी महज 2 ही सीटें जीत पाई थी और 70 उम्मीदवारों की तो जमानत ही जब्त हो गई थी। इसके बाद 2009 के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी महज 3 ही सीटें जीत पाई थी।

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लेकिन 2014 में मोदी मैजिक के दम पर बीजेपी ने 47 सीटें जीत सत्ता पर कब्जा जमाया। इसके बाद लोकसभा चुनावों में मोदी मैजिक का जादू फिर चला और पार्टी ने 10 की 10 लोकसभा सीटों पर कब्जा किया। इसके बाद पार्टी ने जींद का उपचुनाव भी जीता था। हरियाणा के 5 बार के मुख्यमंत्री रह चुके ओम प्रकाश चौटाला के जेल में जाने के बाद से प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी आईएनएलडी अब दो फाड़ हो गई है। पार्टी का एक धड़ा दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी में तो दूसरा धड़ा पंकज सिंह चौटाला की INLD में बंट चुका है। तो ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि इस बार के विधानसभा चुनावों में बाजी कौन मारेगा?