Bengal Vidhan Sabha Chunav 2021: विरोधाभासों की वजह से ही कंगाल हुआ बंगाल

बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को पहले चरण के रिकार्ड मतदान के बाद अब सारी निगाहें दूसरे दौर पर टिक गई हैं। पहली अप्रैल को दूसरे चरण के लिए जिन सीटों पर मतदान होना है, उनमें नंदीग्राम सबसे महत्वपूर्ण है। इस सीट पर राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी मैदान में हैं और उनके सामने कभी उनके दाहिने हाथ रहे सुवेंदु अधिकारी हैं। जाहिर है, इस सीट के साथ मुख्यमंत्री की पूरी राजनीति प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। यही वजह है कि नंदीग्राम में मतदान होने तक ममता बनर्जी वहीं डेरा डाले हुई हैं।

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बंगाल के विधानसभा चुनाव के नतीजे क्या होंगे, इसके लिए तो दो मई तक की प्रतीक्षा करनी होगी, लेकिन ममता बनर्जी को कड़ी चुनौती दे रही भाजपा ने जिस तरह से उनकी राजनीति का पर्दाफाश किया है, वह उल्लेखनीय है। वास्तविकता यह है कि बंगाल को वाकई परिवर्तन की जरूरत है। बंगाली भद्रलोक के इर्द-गिर्द केंद्रित राज्य की राजनीति को अब हाशिए पर खड़े उन लोगों के उन्नयन और उत्थान के बारे में सोचना होगा, जिन्हें सिर्फ वोट बैंक समझा जाता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बंगाल की जनता अपनी पहचान, संस्कृति और भाषा के साथ खड़ी होगी या फिर भाजपा का साथ देगी जिसने राज्य को फिर से सोनार बांग्ला बनाने की घोषणा की है। बंगाल हमेशा से ही अपनी पहचान और संस्कृति को लेकर अहंकार की हद तक गर्व करता रहा है और आज भी करता है। इसका ही नतीजा है कि वह देश के दूसरे राज्यों से खुद को अलग समझता रहा है, लेकिन इस भद्रलोक पहचान के बाहर छूट गए लोगों के लिए इस विशिष्टता का कोई अर्थ नहीं है।

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