Home India बिगड़ रही है धरती की हालत, क़ुदरत का क्रोध रोकना होगा असंभव

बिगड़ रही है धरती की हालत, क़ुदरत का क्रोध रोकना होगा असंभव

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किसी को हद से ज़्यादा सताओगे तो वो इंसान एक न एक दिन आपसे बदला ज़रूर लेगा। ऐसा ही हाल ज़मीन के साथ भी है, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कहा है कि बीते 50 सालों में धरती का संतुलन बेहद बिगड़ चुका है। यहीं वजह है कि रोज़ाना धरती के किसी ना किसी कोने से छोटी या बड़ी त्रासदी के होने की ख़बर सामने आ रही हैं।

हालात देखते हुए UN ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इंसान ने जल्द ही प्रकृति के साथ अपनी मनमानी नहीं रोकी तो क़ुदरत के इस क्रोध को रोकना बिलकुल असंभव हो जाएगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) के World Meteorological Organization (WMO) की रिपोर्ट में ये बात कही गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रकृति के साथ इस खिलवाड़ का खामियाज़ा अंत में इंसान को खुद ही अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया का एक भी कोना ऐसा नहीं है जहां बीते पचास सालों में क़ुदरती कहर ना बरपा हो। इस दौरान बड़ी संख्या में जानमाल का नुकसान भी हुआ है। लाखों लोगों को क़ुदरत के कहर के हाथों अपनी जान गंवानी पड़ी है। कहीं कहीं तो पूरा का पूरा गांव-शहर इसका शिकार हो चुका है।

WMO की रिपोर्ट के मुताबिक 1970 से 2019 के बीच इन पचास सालों में दुनिया भर में अलग-अलग रूप में 11 हजार आपदाएं आई हैं। जिसके चलते पूरी दुनिया को 266 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। साथ ही में इन आपदाओं में करीब 20 लाख लोगों मौत हुई है। मरने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा विकासशील देशों में दर्ज हुई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन देशों के पास इस तबाही के दौरान इस से निपटने की तैयारी ही नहीं थी।

WMO की रिपोर्ट के मुताबिक, “कुदरत के तांडव ने दुनिया को सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाया बल्कि लाखों जिंदगियों को भी लील लिया है। कुदरती आपदाओं के चलते दुनिया को रोजाना औसतन 1475 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यही नहीं रोजाना औसतन 115 लोग इन आपदाओं में अपनी जान गंवाते हैं। रोजाना कहीं चक्रवाती तूफान तो कहीं बारिश से बाढ़ के हालात इस जानमाल के नुकसान का कारण बन रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक 1970 से 1979 के बीच आपदाओं की वजह से रोजाना 358 करोड़ का नुकसान होता था, लेकिन 2010 से 2019 के बीच आपदा की वजह से दुनिया को रोजाना 2797 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ। हालांकि राहत की बात ये है कि पहले के मुकाबले अब लोगों की जान कम जा रही है। 1970 से 1980 के बीच रोजाना औसतन 170 लोग आपदा से जुड़ी घटनाओं में अपनी जान गंवा रहे थे। 1990 से 1999 के बीच मरने वालों की औसत संख्या घटकर 90 हो गई जबकि 2010 से 2019 के बीच आपदा से जुड़ी घटनाओं में मृत्यु की संख्या औसतन 40 पर पहुंच गई है जो सबसे कम है।

भारत को सबसे ज्यादा नुकसान चक्रवाती तूफानों से हो रहा है। देश के 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सीधे-सीधे चक्रवाती तूफानों से प्रभावित हो रहे हैं।

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