देश भर में आज Dussehra की धूम है। पौराणिक कथा के अनुसार Dussehra के दिन भगवान राम ने रावण का वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल की थी। भारत अपनी शानदार सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए हर साल इस त्योहार को बड़े ही धूम धाम से मनाता आया है। इसे Dussehra या विजयदशमी के नाम से जाना जाता है।

हर साल यह त्यौहार पूरे देश में पारंपरिक उत्साह, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। विजयादशमी नाम की जड़ें संस्कृत भाषा में पाई जाती हैं, जहां “विजय-दशमी” का अर्थ है दशमी के दिन जीत। यह ध्यान देने योग्य है कि देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीके से Dussehra उत्सव मनाया जाता है। माना जाता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करके Dussehra के दिन की जीत हासिल की थी। इसलिए विजयदशमी पर्व को शक्ति, स्वास्थ्य और शौर्य का पर्व भी कहा जाता है।

Dussehra के अवसर पर रास लीला, कृष्ण और गोपियों से संबंधित नृत्य और चंद्रावली के मनोरंजक नाटक कुल्लू में किए जाते हैं। कुल्लू Dussehra देवी-देवताओं की एक सप्ताह तक चलने वाली सभा है, जो अश्विन के श्वेत चंद्र काल के दसवें दिन से शुरू होती है और पूर्णिमा के दिन समाप्त होती है।

उत्तर भारत में, Dussehra राम के नाटक या रामलीला के माध्यम से मनाया जाता है। यह दृश्यों की एक श्रृंखला में रामायण महाकाव्य का एक प्रदर्शन है जिसमें गीत, गायन और संवाद शामिल हैं। सबसे ज्यादा आकर्षक रामलीला अयोध्या, रामनगर और बनारस, वृंदावन, अल्मोड़ा, सतना और मधुबनी में होती है। अधिकांश रामलीलाएं रामचरितमानस के प्रसंगों पर आधारित हैं। यह गतिविधियों की एक श्रृंखला के माध्यम से किया जाता है, जो दस से बारह दिनों तक चलती है और कुछ रामलीलाएं पूरे एक महीने तक भी चलती हैं।

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