Digvijaya Singh को मिला मौक़ा, तो क्या अशोक गहलोत का पत्ता साफ़!

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राजनीति में वैसे तो कुछ भी कहना बड़ा मुश्किल सा होता है लेकिन Congress पार्टी में तो और भी धुंधलापन है। वक़्त कोई भी हो स्थिति साफ़ ही नहीं होती। यही वजह है कि कांग्रेस की राजनीति में अलग ही नज़ारा देखा जा रहा है। एक ओर जहां पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh को मैदान में उतारने का फैसला कर लिया है। वहीं, गांधी परिवार के वफादार माने जाने वाले अशोक गहलोत सोनिया गांधी से मिलने का इंतज़ार ही कर रहे हैं। पार्टी आलाकमान ने उन्हें अब तक मिलने का वक्त नहीं दिया है।

Congress के इस रुख से उनकी भविष्य की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत बुधवार (28 सितंबर) को ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। दो दिन से अटकलें हैं कि वह सोनिया से मुलाकात करने वाले हैं, लेकिन अब तक मीटिंग अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है। वह लगातार आलाकमान की तरफ से मीटिंग के लिए समय का इंतजार कर रहे हैं। खबरें हैं कि रविवार को जयपुर में गहलोत समर्थक विधायकों की बगावत से गांधी परिवार खासा नाराज़ हो गया था।

Congress नेताओं का एक वर्ग मान रहा है कि सिंह को मैदान में उतारना अशोक गहलोत को लेकर दबाव की राजनीति का हिस्सा हो सकता है। इसके जरिए पार्टी यह संदेश देना चाहेगी कि वह सचिन पायलट के साथ अपनी जंग छोड़कर पार्टी प्रमुख के लिए तैयारी करें। सूत्रों ने यह भी बताया था कि राजस्थान में सियासी संकट के चलते ही Digvijaya Singh अध्यक्ष पद की रेस में दोबारा शामिल हुए हैं।

8 अक्टूबर को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है। कांग्रेस की तरफ से जारी चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, 24 सितंबर से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया का शुक्रवार यानी 30 सितंबर को अंतिम दिन है। कल ही थरूर और Digvijaya Singh दोनों नामांकन दाखिल कर सकते हैं। भले ही शुरुआती तौर पर मामला थरूर बनाम Digvijaya Singh नज़र आ रहा हो, लेकिन असल स्थिति 8 अक्टूबर को साफ होगी।

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