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Samajwadi Party के सामने सीटों को बचाने की चुनौती

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चुनाव का वक़्त क़रीब आ रहा है लेकिन कुछ पार्टियों के सामने जीत हासिल करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में बही चुनावी लहर में Samajwadi Party यूं तो 48 सीटों पर सिमट गई थी लेकिन इनमें 23 सीटें तो Samajwadi Party ने भाजपा के साथ कड़े मुकाबले में जीती थीं। इसलिए इन पर हार जीत का अंतर 5000 वोटों से कम रहा।

अब इन्हीं सीटों को बचाने की चुनौती सपा के सामने हैं चूंकि यह Samajwadi Party के गढ़ की सीटें हैं। इसलिए यहां प्रतिष्ठा भी ज्यादा लगी है। लिहाजा, राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष Akhilesh Yadav किलाबंदी में जुट गए हैं। Samajwadi Party अब इन सीटों पर खासतौर पर फोकस कर दिया है। कम मार्जिन से हारने वाली सीटें जीतने की रणनीति तो बन रही है पर चुनौती है कि कांटे की टक्कर में जीती इन सीटों को कैसे बरकरार रखा जाए। Samajwadi Party इस बार कई छोटे दलों के साथ सत्ता पर काबिज़ होने की कोशिश में लगी है। ऐसे में वह प्रत्याशियों के चयन में भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। उसकी कोशिश यह भी है कि सहयोगी दलों को नाराज किए बिना अपनी सीटों को बनाए रखा जाए।

Samajwadi Party को उम्मीद है कि इस बार पश्चिम में उसके रालोद के साथ गठबंधन से उसका वोट उसे ट्रांसफर होगा। साथ ही मध्य व पूर्वांचल में भी उसके साथ आए छोटे छोटे दल उसके वोट बैंक में इजाफा करेंगे। Samajwadi Party ने सहारनपुर नगर से जीते संजय गर्ग को फिर उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह नजीबाबाद, सहसवान, कन्नौज, मटेरा, महमूदाबाद, नगीना सीटों पर इन्हीं सिटिंग विधायकों को उतारा है। सहसवान सीट जीते शरदवीर और हरदोई सीट पर जीते नितिन अग्रवाल अब भाजपाई होकर इन्हीं सीट पर किस्मत आजमाने की तैयारी में हैं।

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