अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर यूजीसी के बयान पर ‘आप’ ने कही ये बात

कोरोना वायरस के चलते सभी विश्वविद्यालय और कॉलेजों की परीक्षाओं को टाल दिया था। ऐसे में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालय की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को जरूरी करार देते हुए इसे छात्रों के व्यापक हित में बताया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि दिल्ली की तर्ज पर उत्तरप्रदेश में विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं रद्द कर छात्रों को अगली क्लॉस में प्रोन्नत किया जाए।

यूजीसी के मुताबिक राज्य परीक्षाओं को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले छात्रों के हितों और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आंकलन करें। वहीं परीक्षाओं को लेकर जारी गाइडलाइन पर यूजीसी ने कहा कि आयोग के रेगुलेशन के तहत सभी विश्वविद्यालय उसे मानने के लिए बाध्य है। हालांकि यह विवाद का समय नहीं है। सभी विवि को तय गाइडलाइन के तहत परीक्षाएं करानी चाहिए।

यूजीसी ने दिए संकेत कोरोना के कारण जुलाई की जगह सितंबर में शुरु हो…

आयोग के सचिव रजनीश जैन ने कहा कि उन्होंने सभी राज्यों को परीक्षाओं को लेकर जारी गाइडलाइन और उसे कराने के लिए तय किए गए मानकों का ब्यौरा भेज दिया है। कोरोना के इस संकटकाल में भी दुनिया का कोई विवि या उच्च शैक्षणिक संस्थान बगैर परीक्षा या असेसमेंट के सर्टिफिकेट नहीं दे रहा है। ऐसे में यदि भारतीय विश्वविद्यालय ऐसा करते हैं, तो इसका असर उनकी वैश्विक साख पर भी पड़ेगा। साथ ही जो भारतीय छात्र अपनी डिग्रियों या सर्टिफिकेट को लेकर नौकरियों के लिए जाएंगे, उन्हें भी इस चुनौती की सामना करना पड़ सकता है।

प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह ने पार्टी की छात्र विंग छात्र युवा संघर्ष समिति के प्रदेश पदाधिकारी व जिलाध्यक्षों के साथ डिजिटल मीटिंग कर यह मांग करी कि यूजीसी का आखिरी वर्ष के छात्रों की परीक्षा कराने का निर्णय गलत है। सरकार को ये आदेश तुरंत वापस लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने राज्य के अपने विश्विद्यालयों में सभी परीक्षाएं रद्द कर वैकल्पिक आधारों पर छात्रों को डिग्री देने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

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