बलिदानी Delhi Police इंस्पेक्टर “मोहनचंद शर्मा” जी जयंती. पूछ रहा है राष्ट्र- “बटला का बदला कब”?

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Inspector Mohan Chand

शायद ही किसी को वो दिन भूला हो जब भारत की राजधानी दिल्ली ( Delhi ) के एक विशेष इलाके में गोलियों की तड़तड़ाहट पूरे देश में सुनाई दी थी. वो युद्ध था धर्म और अधर्म के बीच में. वो संघर्ष था रक्षको और भक्षकों के बीच में. अन्य शब्दों में वो लड़ाई थी देव और दानवो के रूप में जिसमे आख़िरकार राष्ट्र और धर्म के शत्रुओं के अलावा हमारे एक रक्षक Delhi Police इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा जी वीरगति को प्राप्त हुए थे.

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आतंकियों के मंसूबे निसंदेह इतने भयावह थे कि दिल्ली पुलिस को तत्काल कार्यवाही करनी पड़ी थी और उन भयावाह मंसूबो के साथ वो सभी आतंकी बटला हाऊस में ही मौत की नींद सुला दिए गए थे। उस समय माना ये जा रहा था कि भारत की राजनीति वीर बलिदानी को पुरष्कृत करेगी पर बाद में जो कुछ भी हुआ वो राष्ट्रवादियों के लिए पीड़ादायक और वामपंथियों के लिए रूटीन प्रक्रिया थी।

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अधर्मियों के विरुद्ध हुए उस धर्म युद्ध के नायक वीर बलिदानी Inspector Mohanchand Sharma जी थे जिनकी आज जयंती है. अफ़ज़ल के लिए शर्मिंदा होने वालों के लिए शर्मिंदगी का विषय ये भी है की आतंकियों का Birthday और मरण दिवस दोनों धूमधाम से मनाने वालों को आज एक महायोद्धा की जन्मजयंती याद भी नहीं रही और हर तरफ पसरा है एक स्याह सन्नाटा।।

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जी हाँ , देश की आंतरिक सुरक्षा को आंतरिक आक्रांताओ से बचाते हुए अपने प्राणो का सर्वोच्च त्याग करने वाले अमर योद्धा दिल्ली पुलिस के वीर इंस्पेकर मोहनचंद शर्मा जी की आज जयंती है..शौर्य के इस प्रतीक को देश और समाज विस्मृत न कर दे उसकी जिम्मेदारी स्वयं समझते हुए आज AB स्टार न्यूज़ इस महान की स्मृति में इस खबर को प्रकाशित कर रहा है।

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देश गवाह है कि भारत के कुछ विशेष राजनेताओं और नेत्रियो के आंसू किस के लिए बहे थे. सबने देखा था कि बलिदान पर ऊँगली किस ने उठाई थी ? सब जानते है कि वीरगति की जांच किस ने मांगी थी ? हर किसी ने देखा था की आतंकियों के नाम पर वोट किस ने और कहाँ कहाँ मांगे थे.. और सत्य ये भी है कि इंस्पेक्टर मोहनचंद जी के बलिदान के गुनहगार बटला के उस आतंकी समूह का समूल नाश अब तक नहीं हुआ है.

इंस्पेक्टर मोहनचदं शर्मा जी का जन्म आज ही के दिन अर्थात 23 सितम्बर वर्ष 1965 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में हुआ था. बचपन से ही देश के अथाह प्रेम ने उन्हें वर्दी की तरफ आकर्षित किया। यकीनन उनको पता रहा होगा की देश न सिर्फ बाहर के शत्रुओ से बल्कि आंतरिक भितरघातियों से भी त्रस्त है, अतः उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ पुलिस विभाग मे जाने का निर्णय लिया होगा।

आख़िरकार देश की राजधानी दिल्ली की पुलिस में भर्ती होने के बाद बलिदानी शर्मा जी ने कई आंतरिक शत्रुओ को पकड़ा और उन्हें क़ानून के हवाले किया। अपनी योग्य कार्यशैली के चलते ही उनको Batla House अभियान की टीम में प्रमुख रूप से शामिल किया गया और उन्होंने अपने चयनकर्ताओ को इस बार भी निराश नहीं होने दिया और अपने प्राणो को दे कर भी उसे सही साबित किया।

आज वीर बलिदान के उच्च बिंदु इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा जी के बलिदानी दिवस पर AB स्टार न्यूज़ परिवार उनको बारम्बार नमन करते हुए उनकी यश गाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है और साथ ही अधर्म और आतंक के तमाम समर्थको से सवाल करता है कि क्या उनके पास देश हित में अमर हुए इस महान योद्धा के लिए बोलने हेतु 4 शब्द भी नहीं हैं ?