IT Sector का बुरा हाल, मंदी की आहट से कर्मचारियों पर दिख रहा सबसे ज्यादा असर

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Corona काल में न जाने कितने लोग बेरोज़गार हो गए। हालात अभी भी सुधरे नहीं हैं। अमेरिका समेत दुनियाभर में मंदी को लेकर बहस छिड़ी हुई है। मंदी पर बहस से इतर ऐसे अर्थशास्त्रियों की सूची लंबी है जो मान रहे हैं कि दुनिया मंदी की चपेट में आ चुकी है। बीते कुछ समय में भारत समेत वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों में छंटनी और हायरिंग फ्रीज होने की वजह से यह डर गहरा होता जा रहा है। हालात ये हैं कि लोगों को अब अपनी जॉब बचाना भी मुश्किल लग रहा है।

टेक सेक्टर में छंटनी सबसे ज़्यादा

वैश्विक स्तर पर Amazon, गूगल, फेसबुक, ट्विटर, Apple जैसी कंपनियों ने या तो छंटनी का ऐलान किया है या फिर नई भर्तियों पर रोक लगा दी है। वहीं, भारत में भी आईटी कंपनियां ना सिर्फ छंटनी पर जोर दे रही हैं बल्कि नई भर्तियों पर भी रोक लगा रखी है। इसके अलावा अनएकेडमी, बायजू जैसे स्टार्टअप्स भी कर्मचारियों की संख्या कम करने में जुटे हैं।

जानें, टेक कंपनियां ही छंटनी पर क्यों दे रही हैं ज़ोर

मंदी के माहौल में सबसे ज्यादा IT Sector में छंटनी या नई भर्तियों पर रोक देखी जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह टेक कंपनियों के निराशाजनक नतीजे हैं। इसके अलावा टेक कंपनियों की स्टॉक की गिरती कीमतों और विज्ञापन से होने वाली आय ने संकट को और बढ़ा दिया है। वहीं, अमेरिका और यूरोप में IT बजट गिरने की चिंता में कंपनियों के कर्मचारियों के बोनस को फ्रीज करने या काटने की भी खबरें आई हैं।

पिछले हफ्ते की ही बात है जब बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्रिटेन में सबसे खराब आर्थिक मंदी की आशंका जाहिर की है। अगर आशंका सच हो जाती है, तो यह भारतीय फर्मों और कर्मचारियों के लिए दोहरी परेशानी का कारण बनेगा क्योंकि ब्रिटेन में भारतीय आईटी कंपनियों के कई बड़े ग्राहक हैं।

भारतीय स्टार्टअप उद्योग भी तनाव के संकेत दे रहा है। Inc42 के लेऑफ ट्रैकर के अनुसार बायजू, Cars24, Ola, LEAD, Meesho, MPL, Trell, Unacademy और वेदांतु जैसे यूनिकॉर्न सहित स्टार्टअप के एक समूह ने सामूहिक रूप से 15,000 कर्मचारियों की छंटनी की है।

इकोनॉमी के लिए भी बढ़ रही टेंशन

भारत के IT Sector पर किसी तरह की चोट पहुंचती है, तो इकोनॉमी के लिए बुरी खबर है। यह देश का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का नियोक्ता है, जो करीब 1.2 करोड़ अप्रत्यक्ष और 50 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां दे रहा है।

जानें, मंदी का मतलब

आमतौर पर मंदी को परिभाषित देश की जीडीपी से किया जाता है। किसी देश की जीडीपी लगातार दो या तीन तिमाही तक दबाव में रहती है या सिकुड़न होता है तो उसे ‘तकनीकी मंदी’ कहा जाता है। अर्थव्यवस्था में सिकुड़न की वजह से ना सिर्फ निवेश का माहौल गड़बड़ होता है बल्कि उपभोक्ताओं के खर्च करने का मिजाज भी संकुचित हो जाता है। इस वजह से उपभोक्ता की डिमांड कमजोर होती है। डिमांड कमजोर होने की वजह से कंपनियां प्रोडक्शन पर कंट्रोल कर देती हैं।

प्रोडक्शन कम या नहीं होने का मतलब है कि कंपनियों को ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत नहीं है। कई कंपनियां बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थिति में कंपनियां छंटनी या हायरिंग फ्रीज करने पर जोर देती हैं।

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