आज शारदीय Navratri का सातवां दिन है। आज के दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। कहते हैं कि आज के दिन जो मां के इस स्वरूप की पूजा करता है मां उसके सारे पापों को हर लेती हैं और व्यक्ति के सारे शत्रुओं का नाश हो जाता है। मान्यता है कि आज के दिन सच्चे मन से मां का ध्यान लगाने मात्र से नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है। मां के इस स्वरूप में घने अंधकार के जैसा काला रंग होता है जिसकी वजह से इन्हें कालरात्रि के रूप में जाना जाता है। मां के तीन नेत्र हैं और तीनों ही गोल हैं साथ ही मां के बाल भी बिखरे हुए हैं। मां का ये रूप बेहद ही भयानक है।

हिंदू धर्मग्रंथों में मां कालरात्रि से जुड़ी कथा का जिक्र मिलता है। मान्यता है कि एक बार चंड-मुंड और रक्तबीज नाम के राक्षसों ने धरती पर हाहाकार मचा दिया था। जिसके बाद मां दुर्गा ने इन राक्षसों का संहार करना शुरु कर दिया। मां ने चंड और मुंड का संहार तो कर दिया लेकिन जैसे ही उन्होंने रक्तबीज का संहार किया वैसे ही रक्तबीज का रक्त जमीन पर गिरते ही हजारों रक्तबीज उत्पन्न हो गए। कहते हैं कि तब रक्तबीज के अत्याचार को खत्म करने के लिए मां दुर्गा ने कालरात्रि का स्वरूप धारण किया था। मां कालरात्रि को काल की देवी के रूप में जाना जाता है।

मान्यता है कि मां काली को गुड़हल का फूल पसंद है। इसलिए आज के दिन मां काली को गुड़हल का फूल अर्पित करना चाहिए और फिर कलश पूजन के बाद मां के समक्ष दीप जलाकर रोली, अक्षत से तिलक करके पूजन करना चाहिए। पाठ के बाद मां काली को गुड़ का भोग लगाना चाहिए

जो कोई भी भक्त नवरात्र के सातवें दिन सच्चे मन से मां कालरात्रि की पूजा करता है मां उसके जीवन से अंधकार को खत्म करके उसकी जिंदगी खुशियों से भर देती हैं।

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