2023 में उड़ान शुरु होने की उम्मीद

ग्रेटर नोएडा में एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने जा रहा है. इस एयरपोर्ट को बनाने वाली कंपनियां ज्यूरिख इंटरनेशनल और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड हैं. इस एयरपोर्ट को बनाने के लिए काम अभी से शुरु हो रहा है और इसके लिए ज्यूरिख कंपनी के कर्मचारी पहले ही भारत आ गये हैं. इस एयरपोर्ट को बनाने वाली कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के अधिकारियों ने इस पर सहमति बना ली है और करार पर हस्ताक्षर कर लिया है.

नोएडा अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से अगले 10 वर्षों में प्रोत्साहित होंगे निवेश के नए अवसर

ग्रेटर नोएडा का यह एयरपोर्ट आने वाले समय में यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करेगा. एयरपोर्ट पर 15 से 20 हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा. इससे इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा. अगले 10-15 वर्षों में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा प्रति वर्ष 30-50 लाख यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाएगा.

इसमें कुल 15 हजार से 20 हजार करोड़ का निवेश होगा. आगरा व वृंदावन के पास का क्षेत्र होने के कारण इसका टूरिजम के लिए विशेष महत्व होगा. यहां पर सैमसंग अपना कार्गो हब बनाना चाहता है, इसकी लोकेशन काफी बेहतर है.

निवेश प्रोत्साहित करेगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट

कोविड-19 महामारी के बावजूद नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा क्षेत्र को चालू वित्त वर्ष के दौरान लगभग 7,617 करोड़ रुपये का निवेश मिला है. एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा था कि इनमें से कुछ बड़े निवेश फॉर्च्यून-500 कंपनियों से मिले हैं. रियल एस्टेट मार्केट को फायदा पहुंचाने वाले अन्य बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तरह जेवर एयरपोर्ट भी नोएडा और उसके आसपास के इलाकों के प्रॉपर्टी मार्केट के समीकरणों को बदल कर रख देगा.

एयरपोर्ट बनने के मद्देनजर रियल एस्टेट डिवेलपर्स ने इलाके के आसपास भारी निवेश किया है. हालांकि प्रॉपर्टी मार्केट में गिरावट होने से मुश्किलें तो आई हैं, लेकिन जेवर एयरपोर्ट प्रॉपर्टी कीमतों को सकारात्मक तरीके से प्रभावित जरूर करेगा.

5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्मित होगा एयरपोर्ट

प्रदेश कैबिनेट से मंगलवार को एयरपोर्ट की बिड जारी करने की अनुमति प्रदान कर दी है. पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल व आठ रनवे के साथ जेवर एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा. हालांकि पहले फेज में दो रनवे का ही निर्माण होगा. 2022-23 से एयरपोर्ट से हवाई सेवाओं की शुरुआत का लक्ष्य है.

जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए रोही, पारोही, दयानतपुर, किशोरपुर, रन्हेरा, बनबारीवास गांव की 1334 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. इसमें 94 हेक्टेयर जमीन सरकारी होने के कारण इसका पुनर्ग्रहण होने जा रहा है.

8 रनवे के साथ देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट 

जेवर एयरपोर्ट पूरा होने के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा जिसमें 6 रनवे एक साथ होंगे. इस वक्त शिकागो का ओ हारे एयरपोर्ट विश्व का सबसे बड़ा एयरपोर्ट है जो 7,200 एकड़ में फैला हुआ है. इस एयरपोर्ट में कुल 8 रनवे हैं. अमेरिका के ही टेक्सस का डलास/फोर्ट वर्थ इंटरनैशनल एयरपोर्ट दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट है. इस एयरपोर्ट में 7 रनवे हैं.

जेवर एयरपोर्ट के लिए यमुना एक्सप्रेस वे इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट अथॉरिटी (येडा) के मास्टर प्लान के तहत तय किया गया है. इस एयरपोर्ट के सीमा क्षेत्र में 6 रनवे होंगे. पूरा होने के बाद यह एयरपोर्ट निश्चित तौर पर देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट साबित होगा.’

वर्ष 2022-23 से हवाई सेवाओं की शुरुआत

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण के साथ गौतमबुद्ध नगर व आसपास के इलाके की तस्वीर बदल जाएगी. 2022-23 से एयरपोर्ट से हवाई सेवा की शुरुआत का लक्ष्य है.

प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में रुचि दिखाई. जून 2017 में जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट को केंद्र ने सैद्धांतिक मंजूरी दी. करीब एक वर्ष के अंदर एयरपोर्ट को केंद्र के सभी संबंधित मंत्रालयों से एनओसी भी मिल गई. 2018 में एयरपोर्ट की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई.

1 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार

जेवर एयरपोर्ट से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है. एयरपोर्ट के नजदीक एयरोसिटी विकसित करने की योजना है. इसमें मल्टीप्लेक्स, मॉल, पब, कंवेंशन सेंटर, मंडी आदि विकसित की जाएगी. इससे किसानों की फसल भी विश्व मार्केट तक पहुंचेगी.

एयरपोर्ट के नजदीक विकसित की जाएगी एयरोसिटी

जेवर एयरपोर्ट के नजदीक एयरोसिटी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. इसमें मल्टीप्लेक्स, मॉल, पब, कंवेंशन सेंटर, मंडी आदि विकसित की जाएगी. इससे देश के किसानों की फसल भी विश्व मार्केट तक आसानी से पहुंचेगी.

वैश्विक बाजार तक पहुंचेगी किसानों की फसल

जेवर एयरपोर्ट के बनने से किसानों की फसल भी वैश्विक स्तर तक आसानी से पहुंच पाएगी. एयरपोर्ट के निर्माण के बाद किसानों को अपना माल लाने ले जाने के लिए आसानी होगी. किसानों को आवागमन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रक्रिया लगातार प्राथमिकता से चल रही है. यूपी के किसानों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में स्थान दिलाने के लिए उनको विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जा रहा है. किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाने एवं सुगमता से दूरदराज मंडियों में बेचने के लिए पहुंचाने के लिए रोड कनेक्टिविटी की सुविधा दिलाई जा रही है.

1.20 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष शुरुआत में एयरपोर्ट से करेंगे हवाई सेवाओं का उपयोग

शुरुआत में एक करोड़ बीस लाख सालाना यात्री जेवर एयरपोर्ट से हवाई सेवाओं का उपयोग करेंगे. जेवर एयरपोर्ट पर आठ रनवे होंगे. यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा. एयरपोर्ट की शुरुआत दो रनवे से होगी. यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ जेवर एयरपोर्ट पर रनवे की संख्या बढ़ाई जाएगी. प्रदेश सरकार ने एयरपोर्ट के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लिमिटेड का गठन किया है.

एयरपोर्ट से कनेक्ट होगी मेट्रो रेल

जेवर में बनने जा रहा देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट मेट्रो के जरिए दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से कनेक्ट होगा. जिसके चलते लाखों लोगों को इसका लाभ मिलेगा. दरअसल, पिछले वर्ष ही दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को जेवर में प्रस्तावित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए 3 अलग अलग प्रस्ताव जमा किए थे. मेट्रो रेल कॉरिडोर के जरिए जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने के प्रस्ताव को सरकार जल्द ही हरी झंडी दिखा सकती है. वहीं, यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट और इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के बीच मेट्रो चलने से न केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों को लाभ मिलेगा, बल्कि इससे दक्षिण दिल्ली के लोग भी लाभान्वित होंगे.

35 किमी लंबे मेट्रो ट्रैक का निर्माण होगा

परी चौक से नोएडा एयरपोर्ट टर्मिनल मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण 2020 में शुरू होगा और 2025 में बनकर तैयार हो जाएगा. 35.64 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर 25 स्टेशन बनेंगे. इसे बनाने में करीब 5708 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह जिले में सबसे लंबा मेट्रो रूट होगा. इससे पहले नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच करीब 29 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर एक्वा मेट्रो दौड़ रही है.

एयरपोर्ट टर्मिनल तक मेट्रो रूट पर होंगे 25 स्टेशन

पहले जेवर से नॉलेज पार्क-2 तक मेट्रो लाने का प्लान था. इसके लिए डीपीआर तैयार हो गई थी. उस डीपीआर के अनुसार नॉलेज पार्क-2 से जेवर में एयरपोर्ट तक मेट्रो का 35.64 किमी लंबा रूट था. इस पर 25 स्टेशन बनाए जाने थे. डीपीआर के अनुसार नॉलेज पार्क-2 से जेवर एयरपोर्ट टर्मिनल तक 27 मिनट का सफर था. यहां 2025 तक मेट्रो को दौड़ाने का टारगेट था. इस पर 5708 करोड़ रुपये लागत आनी थी. अब लागत भी नए सिरे से तय होगी.

एलिवेटेड रोड से जुड़ेंगे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट

दिल्ली-मुंबई के बीच निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कनेक्टिविटी दी जाएगी. बल्लभगढ़ से नोएडा एयरपोर्ट तक सड़क का निर्माण होगा. इसे लेकर हरियाणा व उत्तर प्रदेश सरकार के बीच जल्द बातचीत होने की संभावना है. इंदिरा गांधी इंटरनेशनल आइजीआइ एयरपोर्ट को मुंबई एक्सप्रेस वे से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) सड़क का निर्माण कर रहा है. इससे आइजीआइ एयरपोर्ट दिल्ली और नोएडा एयरपोर्ट के बीच भी सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. दिल्ली-मुंबई के बीच 1250 किमी लंबे एक्सप्रेस वे का निर्माण हो रहा है. इस एक्सप्रेस वे को आइजीआइ एयरपोर्ट दिल्ली से जोड़ने के लिए एनएचएआइ सात चरणों में सड़क का निर्माण कर रहा है. इसका कुछ हिस्सा एलिवेटेड भी है.

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