राजस्थान सरकार भी पंजाब की राह पर

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक सिंह गहलोत ने कैबिनेट के साथ केन्द्र सरकार द्वारा किसानों से सम्बन्धित विषयों पर बनाएं गए तीन नए कानूनों से राज्य के किसानों पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की और कृषि कानून के खिलाफ, विधेयक लाने की बात कहीं. बैठक के बाद जारी सरकारी बयान के अनुसार मंत्री परिषद ने राज्य के किसानों के हित में यह निर्णय किया कि किसानों के हितों को संरक्षित करने के लिए शीघ्र ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए। गहलोत ने अपने ट्वीट के जरिए कहा, ”आज पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध विधेयक पारित किये हैं और राजस्थान भी शीघ्र ऐसा ही करेगा।” बयान के अनुसार, राज्य मंत्री परिषद ने फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की अनिवार्यता पर जोर दिया

पंजाब में केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ विधेयक

पंजाब विधानसभा के दो दिवसीय सत्र में 20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ सदन में प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में कहा गया कि ये तीनों कानून किसान विरोधी थे। इसके साथ ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में तीन विधेयक भी पेश किए। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए व्यवस्था की गई है कि यदि कोई किसानों को MSP से कम कीमत पर उत्पाद बेचने के लिए मजबूर करेगा तो उसे तीन साल तक की जेल हो सकती है।

यह कहना गलत नही होगा कि राज्य सरकारे केन्द्र सरकार द्वारा बनाएं गए कृषि कानून के खिलाफ खड़ी हो गयी हैं वे इसे पूरी तरह से नकार रही हैं. जिस कारण से पहले पंजाब सरकार के द्वारा विधानसभा में तीन विधेयक पेश किए. अब राजस्थान सरकार ने बैठक कर कृषि कानून के खिलाफ विधेयक लाने की बात कर रही हैं.

क्या है कृषि सम्बंधित तीन कानून

पहला बिल
केंद्र सरकार ने इस बिल में किसानों को अपनी फसल देश में कहीं भी बेचने के लिए अज़ाद किया है. साथ ही एक राज्य के दूसरे राज्य के बीच कारोबार बढ़ाने की बात भी कही गई है. इसके अलावा मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टेशन पर भी खर्च कम करने की बात कही गई है.

दूसरा बिल

इस बिल में सरकार ने कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रोविज़न किया गया है. यह बिल कृषि पैदावारों की बिक्री, फार्म सर्विसेज़, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और एक्सपोर्टर्स के साथ किसानों को जुड़ने के लिए मजबूत करता है. कांट्रेक्टेड किसानों को क्वॉलिटी वाले बीज की सप्लाई करना, तकनीकी मदद और फसल की निगरानी, कर्ज की सहूलियत और फसल बीमा की सहूलियत मुहैया कराई गई है.

तीसरा बिल
इस बिल में अनाज, दाल, तिलहन, खाने वाला तेल, आलू-प्‍याज को जरूरी चीजो की सूची से हटाने का प्रोविजन है. माना जा रहा है कि बिल के प्रोविज़न से किसानों को सही कीमत मिल सकेगी क्योंकि बाजार में मुकाबला बढ़ेगा

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