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क्या हिम मानव होते हैं?

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जानिए, कब-कब किए गए हिम मानव देखे जाने के दावे

क्या सचमुच हिम मानव होते हैं. दरअसल कई बार हिम मानव की मौजूदगी के दावे किए जाते हैं। अप्रैल 2019 में भारतीय सेना ने भी हिम मानव येति की मौजूदगी का दावा किया था। ट्वीट में सेना ने कहा था कि मकालू बेस कैंप में हिम मानव के पैरों के निशान मिले हैं। आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं था जब हिम मानव की मौजूदगी को लेकर दावे किए गए हों. इससे पहले भी कई बार हिम मानव की मौजूदगी के दावे किए जा चुके हैं

साल 1832 में पर्वतारोही बीएच होजशन ने बंगाल की एशियाटिक सोसायटी के जर्नल के जरिए हिम मानव के बारे में बताया था। उन्होंने जर्नल में लिखा था कि ‘हिमालय में ट्रेकिंग के दौरान उनके गाइड ने एक विशालकाय मनुष्य जैसे प्राणी को देखा था, जो इंसानों की तरह दो पैरों पर चल रहा था और इसके शरीर पर घने लंबे बाल थे’

हालांकि होजशन ने खुद उस प्राणी को नहीं देखा था और उन्होंने ही इसे येति नाम दिया था

साल 1889 में पर्वतारोहियों के एक दल ने भी हिम मानव के पैरों के निशान देखने का दावा किया था। जिसकी चर्चा किताबों में भी की गई। जिसके बाद 20वीं सदी की शुरूआत में भी पश्चिमी देशों के पर्वतारोहियों की ओर से हिम मानव देखे जाने के दावे किए गए। 1925 में एक फोटोग्राफर एमी डोमबोजी ने कंचनजंगा चोटी के पास अजीब प्राणी को देखने की बात कही। उन्होंने इसे 300 गज की दूरी पर देखा था

1938 में हिम मानव तब सुर्खियों में आया जब कलकत्ता के एक कैप्टन ने हिमालय यात्रा के दौरान येति को देखने का दावा किया साथ ही ये कहा कि हिम मानव मददगार प्राणी है और उसने एक प्राणी को मौत के मुंह से बचाया। 1974 में शेरपा नाम की एक चरवाहा लड़की ने येति को देखने की बात कही और मामले की रिपोर्ट पुलिस को भी दी..फिल 2008 में मेघालय में गोरो हिल्स की पहाड़ियों में भी येति को देखे जाने का दावा किया गया। कहा गया कि इस हिम मानव का वजन करीब 300 किलोग्राम था और फिर साल 2009 में पियोत्रगोवाल्सकी एक फिल्म निर्माता ने पोलैंड की पहाड़ियों में हिम मानव को देखने का दावा किया था

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