Israel में चुपचाप मिलिट्री बेस बना रहा अमेरिका, जानें क्या है सच

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देखते ही देखते Israel और हमास के बीच जंग शुरू हुए एक महीने का वक़्त होने जा रहा है। Israel सेना के पलटवार में अब तक आठ हजार से भी ज्यादा की मौत हो चुकी है। इस युद्ध में इजरायल, फिलिस्तीन के अलावा भी कई देशों की एंट्री हुई है। अमेरिका समेत ज्यादातर पश्चिमी देश Israel के साथ हैं तो ईरान जैसे मुस्लिम देशों ने इजरायली हमले की निंदा की है।

मिलिट्री बेस से हमास और ईरान की लगाई जा सकती है लंका

किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अमेरिका भी पूरी तरह से तैयार है। उसने Israel में अपना मिलिट्री बेस भी तैयार कर लिया है। हालांकि, प्रमुख तौर पर यह मिलिट्री बेस ईरान की मिसाइलों से निपटने के लिए बनाया गया है, लेकिन अब हमास युद्ध में भी यह काम आ सकता है। इस बेस से हमास और ईरान, दोनों की ही लंका लगाई जा सकती है।

कोड-नाम ‘साइट 512’, लंबे समय तक चलने वाला अमेरिकी बेस एक रडार सुविधा है जो Israel पर मिसाइल हमलों के लिए आसमान की निगरानी करती है। अमेरिकी सेना चुपचाप साइट 512 पर निर्माण के साथ आगे बढ़ रही है, जो नेगेव में माउंट हर क्यूरेन के ऊपर स्थित एक वर्गीकृत आधार है।

2017 में भी अमेरिकी सेना की मौजूदगी का पता चला था

Israel में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का पहली बार पता साल 2017 में चला था जब दोनों देशों ने एक सैन्य स्थल का उद्घाटन किया, जिसे अमेरिकी सरकार द्वारा वित्त पोषित वॉयस ऑफ अमेरिका ने Israel की धरती पर पहला अमेरिकी मिलिट्री बेस बताया था। इजरायली वायु सेना के ब्रिगेडियर. जनरल त्ज़विका हैमोविच ने इसे ऐतिहासिक कहा था। उन्होंने कहा, “हमने पहली बार इजरायल एक अमेरिकी बेस स्थापित किया।” हालांकि, इसके एक दिन बाद, अमेरिकी सेना ने इस बात से इनकार कर दिया था कि यह एक अमेरिकी बेस है और जोर देकर कहा कि यह इजरायली बेस पर काम करने वाले अमेरिकी सदस्यों के लिए केवल एक रहने की सुविधा थी। हालांकि, साइट 512 की स्थापना फिलिस्तीन के हमास आतंकियों से Israel के लिए खतरे से निपटने के लिए नहीं की गई थी, बल्कि ईरानी मध्य दूरी की मिसाइलों से उत्पन्न खतरे से निपटने के लिए की गई थी।

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