अब India Gate पर नहीं जलेगी Amar Jawan Jyoti की लौ, जानें वजह

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न जाने कितने लोगों ने बचपन से दिल्ली के India Gate पर 24 घंटे जलने वाली Amar Jawan Jyoti की लौ को देखा होगा लेकिन अब इसे India Gate पर नहीं देखा जाएगा। दरअसल दिल्ली के India Gate पर 24 घंटे जलने वाली Amar Jawan Jyoti की लौ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की मशाल के साथ विलीन होने जा रही है। करीब 50 साल बाद यह ज्योति बुझने जा रही है।

India Gate पर बने Amar Jawan Jyoti की जलते रहने वाली लौ अब 50 साल बाद हमेशा के लिए बुझ जाएगी। अब यह मशाल राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) की मशाल के साथ मिला दी जाएगी। शुक्रवार(21 जनवरी) दोपहर एक समारोह में ज्योति का एक हिस्सा India Gate से करीब 400 मीटर दूरी पर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ले जाया जाएगा। बता दें कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। शहीदों को श्रद्धांजलि देने और देश के प्रति उनके बलिदान को याद रखने के लिए National War Memorial की मशाल जलती रहेगी।

Amar Jawan Jyoti का उद्घाटन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गणतंत्र दिवस 1972 पर किया था। India Gate के नीचे Amar Jawan Jyoti को 1971 में पाकिस्तान पर भारत की जीत के बाद प्रज्ज्वलित किया गया था। युद्ध में मारे गए भारतीय सैनिकों के सम्मान में यह ज्योति आज तक जलती आ रही है। India Gate का निर्माण ब्रिटिश सरकार ने पहले विश्व युद्ध और अन्य अभियानों में मारे गए करीब 90 हजार सैनिकों की याद में किया था।

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शहीदों को श्रद्धांजलि देने National War Memorial ही जाएंगे। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कुछ लोग देश प्रेम और बलिदान नहीं समझते। उन्होंने ट्वीट किया, “बहुत दुख की बात है कि हमारे वीर जवानों के लिए जो अमर ज्योति जलती थी, उसे आज बुझा दिया जाएगा। कुछ लोग देशप्रेम व बलिदान नहीं समझ सकते- कोई बात नहीं…हम अपने सैनिकों के लिए Amar Jawan Jyoti एक बार फिर जलाएंगे!” इस कदम की तीखी आलोचना के बीच सरकार ने कहा कि “बहुत सारी गलत सूचना” प्रसारित हो रही थी। मीडिया में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है, ” Amar Jawan Jyoti की लौ बुझ नहीं रही है। इसे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की लौ में मिलाया जा रहा है” Amar Jawan Jyoti की लौ 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए स्थापित की गई थी।

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