पिता का साया सर से उठा तो Akhilesh Yadav ने लिखा- आज पहली बार ऐसा लगा है कि बिन सूरज के सवेरा उगा है

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हर इंसान जानता है कि एक न एक दिन उसको और उसके करीबियों को इस दुनिया से जाना है बावजूद इसके किसी अज़ीज़ के जाने का ग़म बर्दाश्त नहीं होता है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने ट्वीट कर अपना दर्द साझा किया है। ट्वीट में Akhilesh Yadav ने लिखा है कि आज पहली बार लगा… बिन सूरज के हुआ सवेरा।

पिता के निधन से व्यथित Akhilesh Yadav ने इस ट्वीट के साथ दो तस्वीरें शेयर की हैं। इसमें Akhilesh Yadav पिता के अंतिम संस्कार के बाद जलती चिता को प्रणाम करते दिख रहे हैं। वहीं, दूसरी तस्वीर में पंचतत्व में विलीन हुए मुलायम की चिता की राख दिख रही है। Akhilesh Yadav वहां पर शुद्धिकरण की विधि को पूरा कराने पहुंचे हैं। बता दें कि श्रद्धांजलि के बाद सभी चले गए। Akhilesh Yadav रात को अपनी पिता की यादों के साथ उनकी जलती चिता के आगे हाथ जोड़े खड़े दिख रहे हैं। इस तस्वीर ने उनके समर्थकों को भावुक कर दिया है।

Akhilesh Yadav पिता के निधन के बाद से लगातार तमाम व्यवस्थाओं में जुटे रहे। पिता के पार्थिव शरीर को पैत्रिक गांव तक लाने से लेकर अंतिम संस्कार की तैयारी तक। अंतिम संस्कार के बाद जब सब चले गए तो अखिलेश यादव अकेले थे। कुछ साथियों के साथ। श्मशान घाट में पिता का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो रहा था। भावुक Akhilesh Yadav पिता की अंतिम यात्रा को निहार रहे थे। हाथ जुड़े हुए थे। उस समय तक तो लग रहा था कि पिता का साया साथ में है। लेकिन, अगली सुबह आग राख में बदली। नेताजी अनंत यात्रा पर निकल गए तो यह सुबह Akhilesh Yadav के लिए एक बड़ा सदमा जैसी दिखी।

ये एक ऐसी सुबह थी जिसमें अखिलेश के साथ आज हर कोई था, साथी थे, परिवार था, बच्चे थे, लेकिन वह अभिभावक नहीं था। वह पिता नहीं थे। जिन्होंने जीवन में उंगली पकड़ कर चलना सिखाया और राजनीतिक जीवन में भी। जिन उंगलियों को पकड़ कर उन्होंने सैफई की गलियां नापी। लखनऊ की राजनीतिक गलियारा भी। इस सुबह का सूरज उन्हें अंधकार बिखेरता दिखा। जब राख बने पिता की अस्थियों को चुनने के लिए बैठे।

सैफई में Mulayam Singh Yadav के निधन के बाद शुद्धिरकण संस्कार पूरा कराया गया। इस दौरान पूरा परिवार साथ रहा। Akhilesh Yadav ने बाल छिलवाए। इसके साथ ही पुत्र के उस फर्ज को पूरा कराया, जिसकी उम्मीद हर पिता अपने पुत्र से करता है। इस दौरान शिवपाल एक बार फिर भावुक दिखे। उन्होंने कहा कि Mulayam Singh Yadav हमलोगों के लिए सबकुछ थे। आज ऐसा लग रहा है, जैसे सबकुछ खत्म हो गया। मुलायम का जाना पूरे परिवार को भावुक कर रहा है। Mulayam Singh Yadav के जाने का ग़म तो बहुत है लेकिन उनके परिवार और उनके करीबियों को इस गम से उबरने में वक़्त लगेगा।

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