Agneepath Scheme: अभ्यर्थियों को सता रहा Shaadi न होने का डर, बोले- कोई भी अपनी बहन को खाई में नहीं धकेलना चाहेगा

0
182

एक वक़्त था जब कोई भी बाप या भाई अपने घर की बेटी की Shaadi सेना में काम करने वाले युवक के साथ करने में अपनी शान समझता था लेकिन अब एक वक़्त ऐसा भी आने वाला है जब सेना में काम करने वालों को कोई अपने घर की बेटी देने को तैयार नहीं होगा। ऐसा हम नहीं बल्कि ख़ुद अभ्यर्थियों की सोच ही यही बन गई है।

अग्निपथ अग्निवीर भर्ती योजना(Agneepath Agniveer Recruitment Scheme) ने बिहार में कई लोगों के मन में दूरगामी सामाजिक-आर्थिक प्रभावों की आशंकाओं को जन्म दिया है। उन्हें डर है कि इससे युवावस्था में सेवानिवृत्त हुए अग्निवीरों की Shaadi की संभावनाएं प्रभावित होंगी। साथ ही युवा सेना की नौकरी से मिलने वाले आर्थिक-सामाजिक लाभ से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि Agneepath Scheme को लेकर आशंकाएं मुख्य रूप से इस तथ्य से उत्पन्न हुई हैं कि इसमें अनुबंध के आधार पर युवाओं की भर्ती करने और उनमें से अधिकतर को चार साल की सेवा के बाद बिना पेंशन या अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ के सेवानिवृत्त करने का प्रावधान है।

चौदह जून को केंद्र सरकार द्वारा Agneepath Scheme की घोषणा करने के साथ ही बिहार में इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

अभी भी नौकरी की तैयारी कर रहे सिंह के दिमाग में खुद की Shaadi का ख्याल फिलहाल नहीं आया है, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या वह किसी ‘अग्निवीर’ से अपनी बहन की शादी कराने में सहज होंगे तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अलबत्ता फोन पर एक लंबी चुप्पी साध ली।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के नेता कुणाल ने कहा छोटे और मध्यम आय वर्ग के किसान इस योजना से सबसे अधिक प्रभावित होंगे, क्योंकि वे अपने बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों या शिक्षण संस्थानों में भेजने का खर्च नहीं उठा सकते। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि Agneepath Scheme के तहत भर्ती होने वाले युवाओं के लिए मुश्किल से Shaadi के प्रस्ताव आएंगे।

कुणाल ने कहा, “कोई अपनी बेटी या बहन की Shaadi भला एक असफल और अस्वीकृत सैनिक से क्यों करेगा, जिसे न तो पेंशन और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा हासिल है? इस योजना का राज्य में बहुत गहरा सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ेगा।”

बांका जिले के शीनू ने कहा, “पहले सशस्त्र बलों में नौकरी का मतलब था ‘जीवन सेट हो गया।’ न केवल व्यक्ति, बल्कि उसके बच्चों और बच्चों के बच्चों का भी। मतलब, उनकी आने वाली पीढ़ियों को सेना की महज एक नौकरी से फायदा मिल जाता था। पर अब यह संभव नहीं होगा।” शीनू के अनुसार, यह योजना राज्य की अन्य सामाजिक वास्तविकताओं के साथ भी तालमेल नहीं खाती है। उन्होंने कहा, “यह एक नए सामाजिक समीकरण को जन्म देगा। पहले कन्या पक्ष सशस्त्र बलों में स्थायी नौकरी वाले दूल्हे की तलाश करता था। अब उन्हें ऐसे दूल्हे मिलेंगे, जो पहले ही सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।” शीनू ने कहा, “और ‘अग्निवीर’ बनने वाले हर व्यक्ति में चार साल बाद दूसरी नौकरी हासिल करने के लिए जरूरी प्रतिभा नहीं होगी। कोई भी अपनी बहन को खाई में नहीं धकेलना चाहेगा।”

यह भी पढ़ें – Shahid Kapoor की पत्नी Mira ने भारतीय लोगों को सिसिली न जाने की दी सलाह

ABSTARNEWS के ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं. हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो कर सकते है