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कोविड एल-1 अस्पताल में डॉक्टरों पर मरीजों का खाना खाने का लगा आरोप

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डॉक्टर और कर्मचारियों ने रोका काम, दी हड़ताल की चेतावनी

कभी कोरोना अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव तो कभी डॉक्टर्स की लापरवाही। इस कोरोना युग में इस वक्त देश में स्थिति काफी खराब हो चुकी है जिसको देखते हुए सरकार कई सारी योजनायें भी लेकर आयी। लेकिन अब आपको एक अलग ही वाक्या बतायेंगे जिसको जान आप भी सोच में पड़ जायेंगे। जी हां यूपी में फर्रुखाबाद के बरौन में कोविड एल-1 अस्पताल में गुरुवार को डॉक्टरों और कर्मचारियों ने हड़ताल कर सारी सेवायों देना बंद कर दिया। इस दौरान इन आक्रोशित डॉक्टरों से जब हड़ताल का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके पर आरोप लगाया जा रहा है कि किचन से जो नाशता और खाना मरीजों के लिए बनता है उसे पहले हीवो लोग यानि की अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी खा लेते हैं। जिससे मरीजों को खाना ही नहीं मिल पाता। इस तरह के आरोपों से समाज में उनकी छवि खराब हो रही है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि कार्रवाई नहीं होने तक हड़ताल भी कर सकते हैं।

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आपको बता दें कि फर्रुखाबाद के कोविड एल-1 अस्पताल में 18 कोरोना संक्रमित मरीजों के भर्ती होने के बावजूद भी व्यवस्थाएं कई दिनों से पटरी पर नहीं आ पा रही थीं और अब गुरुवार को गुस्साए डॉक्टरों और कर्मचारी कोविड अस्पताल की सेवा ठप कर धरने पर बैठ गए।उन्होंने साफ कहा कि उनके खिलाफ एक अखबार में समचार प्रकाशित किया गया हैजिसमें उन पर कोरोना संक्रमित मरीजों का खाना खाने का आरोप लगाया गया है, जो बिल्कुल ही कि निराधार है। उन्होंने कहा कि एक तो हम लोग परिवार से दूर रहकर कोरोना संक्रमित मरीजों की दिन-रात देखभाल कर रहे है और वहीं दूसरी तरफ हम ही लोगों के ऊपर दबाब भी बनाया जा रहा हैजिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डॉक्टरों की हड़ताल के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों की चिंता और बढ़ गई है। वहीं हड़ताल की सूचना पाकर प्रशासनिक अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया है।बताते चलें कि पिछले दिनों जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने कोविड एल-1 अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान मरीजों ने नाश्ता और चाय न मिलने की शिकायत की थीजिसके बाद डीएम को किचन में ताला लगा मिला था। जिस पर वहां ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया.

लेकिन सोचने वाली बात है कि जो डॉक्टर और कर्मचारी दिन रात कोरोना मरीजों की सेवा कर रहे हैं उन पर ही खाना चोरी का इल्ज़ाम लगा दिया। खैर इस बात में कितनी सच्चाई है ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन अभी भी कोरोना मरीज और डॉक्टरों की जिंदगी बीच मजधार नें ही लटकी नजर आ रही है।

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