आज के दौर में भारतवासियों ने पश्चिमी सभ्यता को इस कदर खुद पर हावी कर लिया है कि, लगता है मानों हमारी सभ्यता ही खोती जा रही है।

भारत में कई धर्म-जाति और समुदाय के लोग रहते हैं जिनकी अपनी सभ्यता-परंपरा और वेशभूषा है । लेकिन आज के दौर में भारतवासियों ने पश्चिमी सभ्यता को इस कदर खुद पर हावी कर लिया है कि, लगता है मानों हमारी सभ्यता ही खोती जा रही है। चाहे वो खान-पान हो, चाहे वेशभूषा या फिर त्योहार, लोगों ने पश्चिमी सभ्यता को कई हद तक अपना लिया है।

Image result for इस अभियान का नाम 'घूंघट मुक्‍त जयपुर' दिया गया है।

उदाहरण स्वरूप, जहां पहले शादी के बाद बहु हमेशा से ही घर हो चाहे बाहर ‘घूंघट’ निकालकर रखती थी। वहां अब बहुएं बिना ‘घूंघट’ के रहती है। कई जगहों पर तो बहुएं शादी के बाद ही जींस-टॉप तक पहनने लगती हैं। इसी क्रम में राजस्‍थान के सीएम अशोक गहलोत ने आह्वान किया था कि घूंघट की कुप्रथा को खत्‍म किया जाए। जिसके बाद जयपुर में जिला प्रशासन ने पिछले जमाने से जारी कुप्रथा ‘घूंघ ट’ के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाया है।

बता दें, इस अभियान का नाम ‘घूंघट मुक्‍त जयपुर’ दिया गया है। जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य पीढ़ियों से चली आ रही इस कुप्रथा के बारे में लोगों को शिक्षित किया जाना है, ताकि समाज में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता का रास्‍ता साफ हो सके। इसके साथ ही, राज्‍य में आगामी पंचायत चुनाव में भी महिलाओं को चेहरा ना ढंकने के लिए प्रेरित किया।

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महिला सशक्तिकरण के डेप्युटी डायरेक्टर राजेश डोगीवाल ने कहा कि, ‘गांवों में पंचायत चुनाव के समय महिलाओं को मतदान करते वक्त घूंघट से बचने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान के तहत हर गुरुवार को ग्राम पंचायत स्‍तर पर एक महिला सभा को आयोजित किया जाएगा, इसमें आंगनवाड़ी वर्कर्स को भी सम्मिलित किया जाएगा।’ जयपुर के कलेक्टर जोगा राम का कहना है कि, घूंघट मुक्‍त जयपुर की दिशा में ये पहली बैठक थी। उन्‍होंने कहा कि इस अभियान को कारगर बनाने के लिए समाज के सभी तबकों को साथ आना होगा।

गौरतलब हो कि, ये जागरूकता अभियान मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप और सोशल मीडिया वेबसाइटों, स्‍कूलों और गांवों में महिला ग्राम सभा के माध्‍यम से चलाया जाएगा। वहीं, सभी सरकारी स्‍कूलों में बच्‍चों के माता-पिता और संरक्षकों को बाल सभा के दौरान इस कुप्रथा के बारे में जानकारी दी जाएगी।

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