हम सोशल मीडिया पर अपना पर्सनल डेटा शेयर करते है। चाहे वो फेसबुक, व्हाट्सएप हो या फिर आधार कार्ड। जिसके चलते हमारा पर्सनल डेटा के किसी भी समय चोरी होने का खतरा बना रहता है।

आजकल हम सोशल मीडिया पर अपना पर्सनल डेटा शेयर करते है। चाहे वो फेसबुक, व्हाट्सएप हो या फिर आधार कार्ड। जिसके चलते हमारा पर्सनल डेटा के किसी भी समय चोरी होने का खतरा बना रहता है। जिसके चलते हमारे डेटा का गलत इस्तेमाल भी किया जाता है। वर्तमान समय में डाटा चोरी होने की ख़बरें बेहद आम हो चुकी है। जिसका हरजाना बेगुनाह लोगों को चुकाना पड़ रहा है।

आपको बता दें कि कैसे और किसका डेटा चोरी होता है। बीते कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि व्हाट्सएप के जरिए स्पाइवेयर पेगसस भारत के सरकारी ऑफिसर, पत्रकारों और अन्य लोगों के पर्सनल डेटा की जासूसी कर रहा है। यह जासूसी सिर्फ एक मिस्ड कॉल के जरिए होती है। जिसके बाद यह वायरस फोन में एंटर कर जाता है। जिसके बाद शुरु होती है पर्सनल डेटा चोरी करने की प्रक्रिया की शुरुआत।

हालांकि अब सरकार ने इसी निजी डाटा को सुरक्षित बनाने के लिये एक योजना तैयार की है। इसी के चलते सरकार जल्द ही डाटा प्रोटेक्शन बिल लाने की तैयारी में है। जिसको बनाने की प्रक्रिया सरकार ने शुरु कर दी है। आपको बता दें कि इस बिल को लेकर कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी है। बिल के मुताबिक सरकारी और प्राइवेट एजंसियों को आम लोगों के निजी डाटा के सही और पारदर्शी इस्तेमाल की ज़िम्मेदारी सौंपी जाएगी।

आखिर क्या होगा बिल पास होने के बाद?

अब जब सरकार ने डाटा प्रोटेक्शन बिल को बनाने की तैयारी शुरु कर दी है। तो यह जानना भी जरुरी हो गया है कि आखिर इस बिल के बनाने के बाद क्या फायदे होगें। इस बिल के बाद हर कंपनी को यह बताना होगा कि आखिर वो लोगों का पर्सनल डेटा की जानकारी क्यों और कैसे ले रहे हैं। कंपनिया यह डेटा लेती भी है तो वह इस डेटा का इस्तेमाल कैसे करेंगें। तो अब यह तो डाटा प्रोटेक्शन बिल बनने के बाद ही पता चलेगा कि यह बिल किस हद तक आम लोगों के लिए फायदेमंद होगा।

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