नागरिकता संशोधन विधेयक पर राजनीतिक खेमेबंदी की तस्वीर साफ हो गई है। शिवसेना के मुताबिक केंद्र इस बिल के जरिए हिंदू-मुस्लिमों के बीच अदृश्‍य बंटवारा कर रही है।

नई दिल्ली: धारा 370 और तीन तलाक के बाद अब नागरिकता संशोधन बिल पर घमासान मचा हुआ है. सोमवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरु बिल पर बवाल होना शुरु हो गया. बिल पेश करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह बिल 0.001 प्रतिशत भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है।

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इस बिल से जुड़े विपक्ष के हर सवाल का जवाब दिया जाएगा। नागरिकता संशोधन विधेयक पर राजनीतिक खेमेबंदी की तस्वीर साफ हो गई है। शिवसेना के मुताबिक केंद्र इस बिल के जरिए हिंदू-मुस्लिमों के बीच अदृश्‍य बंटवारा कर रही है।इस बिल को लेकर तमाम सांसदों ने बड़ी बातें कहीं हैं टीएम सांसद सौगत राय ने कहा, गृह मंत्री नए हैं, उन्हें शायद नियमों की जानकारी नहीं है। इसी बात पर सदन में हंगामा हो गया। सौगत राय ने कहा कि आज की मौजूदा तारीख में संविधान संकट में है।

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जवाब में शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी भी तरह से देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है, इसका में विश्‍वास दिलाता हूं। गृह मंत्री ने कहा, वह अभी बिल पेश कर रहे हैं और विपक्षी सांसदों के एक-एक सवालों का जवाब देंगे। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ  नेता मनीष तिवारी ने लोकसभा में कहा कि देश में बेरोजगारी दर 45 साल के उच्चतम स्तर पर है। देश की मौजूदा आर्थिक सुस्ती को देखते हुए क्या सरकार ऐसा डेटाबेस बना सकती है, जिससे पता चले कि जिसने एजुकेशन लोन लिया है उसे रोजगार मिला या नहीं?

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कुलमिलाकर लोकसभासे नागरिकता संशोधन बिल 293 वोटों से पास हो गया है लकिन अव मोदी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है कि इस बिल को राज्यसभा से भी पास कराए, तब जाकर ये कानून का शक्ल ले पाएगा।

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