जगदीश चंद्र बसु विज्ञानकथाएँ भी लिखते थे और इन्हें बंगाली विज्ञानकथा-साहित्य का पिता भी माना जाता है।

भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ॰ (सर) जगदीश चन्द्र बसु का आज 161वां जन्मदिन है। वे भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्हे भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान और पुरातत्व का गहरा ज्ञान था। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया।

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सर जगदीश चंद्र बसु का जन्म 30 नवंबर 1858 को बंगाल (अब बांग्लादेश) में ढाका जिले के फरीदपुर के मेमनसिंह में हुआ था। इनके पिता भगवन चंद्र बसु जो ब्राह्मण समाज के नेता थे और फरीदपुर, बर्धमान एवं अन्य जगहों पर उप-मैजिस्ट्रेट या सहायक कमिश्नर थे। इन्हें रेडियो विज्ञान का पिता कहा जाता है। जगदीश चंद्र बसु विज्ञानकथाएँ भी लिखते थे और इन्हें बंगाली विज्ञानकथा-साहित्य का पिता भी माना जाता है। उनकी शिक्षा गांव के एक बांग्ला विद्यालय में आरम्भ हुई। जहाँ उन्होंने ग्यारह साल की उम्र तक शिक्षा ग्रहण की।

आज है जगदीश चंद्र बसु का 161वां जन्मदिन,

उनके पिता का मानना था कि अंग्रेजी सिखने से पहले अपनी मातृ भाषा अच्छे से आनी चाहिए।  स्कूली पढ़ाई ख़त्म करने के बाद सर कोलकाता चले गए और सेंट जेवियर स्कूल में नामांकन करवाया।  उनकी रूचि जीवविज्ञान में थी और २२ साल की आयु में चिकित्सा विज्ञान की बसु पढाई करने के लिए लंदन चले गए। लेकिन स्वास्थ ख़राब रहने की वजह से चिकित्सक बनने का विचार त्यागकर कैंब्रिज के  क्राइस्ट महाविद्यालय चले गये और वहाँ भौतिकी के एक विख्यात प्रो॰ फादर लाफोण्ट ने बसु को भौतिकशास्त्र के अध्ययन के लिए प्रेरित किया।

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आज है जगदीश चंद्र बसु का 161वां जन्मदिन,

वर्ष 1885 में स्वदेश आने के बाद उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में भौतिकी पढ़ने लगे। उस समय में भारतीय शिक्षकों को अंग्रेजों की तुलना में एक तिहाई वेतन दिया था।  बसु ने इसका विरोध किया। और बिना वेतन के लगातार तीन साल विद्यालय में पढ़ाते रहे। जिसका परिणाम यह हुआ की उन पर बहुत सारा कर्जा हो गया। जिसे चुकाने के लिए उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन बेचनी पड़ी थी। अंततः चौथे वर्ष ब्रिटिश सरकार को उन्हें पूरा वेतन देना पड़ा। उन्होंने कई सारे शोध किये और रेडियो की खोज में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा। रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य करने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु थे।

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