मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में सदस्यों ने अयोध्या फैसले के खिलाफ रिव्यु पिटीसन दाखिल करने का फैसला लिया है

आज यानी रविवार को लखनऊ के मुमताज पीजी कॉलेज में हुई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में सदस्यों ने अयोध्या फैसले के खिलाफ रिव्यु पिटीसन दाखिल करने का फैसला लिया है। मुस्लिम पक्ष का मत है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें इंसाफ नही दिया गया है। बस तसल्ली भर दी गई है। साथ ही बैठक में यह फैसला लिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुस्लिम पक्ष को दी जाने वाली 5 एकड़ जमीन नहीं स्वीकारी जायेगी।

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बता दें की बैठक के बाद लॉ बोर्ड के सदस्यों ने प्रेस कांफ्रेस कर अपने फैसले की जानकारी दी। और लॉ बोर्ड के सचिव एडवोकेट जफरयाब जिलानी ने कहा कि हमें वही जमीन चाहिए जिसके लिए हमने इतना संघर्ष किया। मस्जिद के लिए किसी दूसरी जगह जमीन लेना हमारे कानुन के खिलाफ है। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर सहमती जताई है कि वहां नमाज पढ़ी जाती थी जबकि गुंबद के नीचे भगवान राम के जन्मस्थान का कोई सुराख नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मस्जिद की जमीन के बदले और कोई जमीन नहीं ली जा सकती है। साथ ही याचिका दाखिल करने को लेकर उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि हमारे पास 30 दिन का समय है। और इस बीच हम पूरी तैयारी कर लेंगे।

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बता दें कि अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अहम् फैसला सुनाया था। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ द्वारा यह फैसला लिया गया था। कोर्ट ने हिंदू पक्ष में फैसला दिया था। जिसके तहत विवादित जमीन राम मंदिर के लिए दे दी गई है। जबकि मुस्लिम पक्ष को कोर्ट ने अयोध्या में ही मस्जिद बनाने के लिए अलग जगह जमीन देने का आदेश दिया है।

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