यह त्यौहार 8 नवंबर और 9 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस विवाह की रस्में एक आम विवाह की तरह ही होती है

भारत अपनी परम्पराओं के लिए जाना जाता है. भारत देश को त्योहारों का देश कहा जाता है. आज देवउठनी एकादशी है इस पर्व पर तुलसी का विवाह करवाने की भी परंपरा है। जैसे हर बार त्योहारों को लेकर दो तारीखें सामने आती है वैसे ही तुलसी विवाह को लेकर भी दो तारीखें सामने आ रही है। यह त्यौहार 8 नवंबर और 9 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस विवाह की रस्में एक आम विवाह की तरह ही होती है जिसमें शादी से लेकर विदाई तक की सारी रश्मे निभाई जानी बहुत जरूरी होती है। माना जाता है कि तुलसी विवाह से कन्या दान जैसा पुण्य प्राप्त होता है।

तुलसी विवाह से कन्या दान जैसा पुण्य प्राप्त होता है।

मान्यता यह है कि देव और असुरों के बीच जब समुद्र मंथन हुआ था तो उस समय जो अमृत धरती पर मिला था, उसी के प्रभाव से ही तुलसी की उत्पत्ति हुई। श्यामा तुलसी, सफेद तुलसी और राम तुलसी। इनमें से श्यामा तुलसी को हर घर में सबसे अधिक प्रधानता दी गई है। ये भगवान का खास प्रिय माना जाता है।

आइए हम जानते है कि क्या हैं तुलसी विवहा की विधि

तुलसी विवाह एक आम विवाह की तरह किया जाता है। जिसमें विवाह के मंडप को गन्नों से सजाकर तुलसी को लाल कपड़े के साथ सजा कर विशेष श्रृंगार किया जाता है। शालिग्राम के बाईं तरफ तुलसी को रख कर पूजा की होती है।

तुलसी विवाह से कन्या दान जैसा पुण्य प्राप्त होता है।

आइए जानते है कि तुलसी विवाह करने से हमे क्या फल प्राप्त होता है

मान्यता ऐसी है कि तुलसी विवाह की पूजा में शामिल होकर प्रार्थना करने वाले अविवाहित युवक-युवतियों का विवाह जल्दी हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा की सात परिक्रमा करते समय देव उठनी के गीत गाएं जाते है। मान्यता ऐसी भी है कि जिनके घर में बेटियां नहीं होती, वे तुलसी विवाह के जरिए कन्यादान का सुख प्राप्त करते है।

तुलसी विवाह का मुहूर्त

द्वादशी तिथि का प्रारंभ – 8 नवंबर 2019 को दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से

द्वादशी तिथि का समापन – 9 नवंबर दोपहर 2 बजकर 39 मिनट पर

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