अयोध्या मामले में आने वाले इस फैसले को देखते हुए ना सिर्फ अयोध्या बल्कि पूरे यूपी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

दशकों पुराने अयोध्या मामले में जल्द फैसला आने वाला है। दशकों पुराने इस विवाद पर अब जल्द ही पूर्ण-विराम लग जाएगा। 1853 में अयोध्या में हुए थे दंगे के बाद बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद ने तूल पकड़ा था। इसके बाद आया 23 दिसंबर 1949 का वो दिन जिस दिन मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियां मिली, हालाकि उस वक्त मुस्लिम पक्ष ने चुपचाप मूर्ति रखने का आरोप लगाया था। इसके बाद 16 जनवरी 1950 को गोपाल सिंह विशारद द्वारा पहली बार सिविल कोर्ट से यहां पूजा करने की इजाजत मांगी गई और यहीं से पुरी  कानूनी लड़ाई शुरू हुई जो 2019 आते-आते कई पड़ावों से होती आज फैसले के कगार पर है।

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अयोध्या मामले में आने वाले इस फैसले को देखते हुए ना सिर्फ अयोध्या बल्कि पूरे यूपी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, साथ-साथ देश के तमाम राज्यों में भी सुरक्षा-व्यवस्था पर खासा ध्यान दिया जा रहा है। इस बीच चीफ जस्टिस रंजन गोगोई फैसले से पहले तैयारियों का जायजा लेने के लिए यूपी के मुख्य सचिव और डीजीपी से मुलाकात करेंगे। वहीं गृह मंत्रालय द्वारा भी पहले ही राज्यों को अलर्ट पर रहने के लिए कहा गया है।

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प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो अयोध्या जिले को चार जोन- रेड, येलो, ग्रीन और ब्लू में बांटा गया है। इनमें 48 सेक्टर बनाए गए हैं। विवादित परिसर, रेड जोन में स्थित है। पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा योजना इस तरह बनाई जा रही है कि एक आदेश पर पूरी अयोध्या को सील किया जा सके। दीपोत्सव के मौके पर यहां सुरक्षाबलों की 47 कंपनियां पहुंची थीं, जो अभी भी तैनात है। वहीं प्रशासन ने फैसले का समय नजदीक आने पर, अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त 100 कंपनियों की भी मांग की है।

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आज के दौर में सोशल मीडिया बेहद प्रभावशाली हो गया है। दंगईयों का एक बहुत बड़ा हथियार यह साबित हो रहा है। इसी को देखते हुए अयोध्या पुलिस ने सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या किसी भी सम्प्रदाय के खिलाफ भड़काऊ कंटेंट के प्रसार पर नजर रखने के लिए जिले के 1600 स्थानों पर 16 हजार वॉलंटियर तैनात किए हैं।

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