जीतनराम मांझी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके द्वारा कई बार दोहराने के बाद भी महागठबंधन में को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन नहीं हो पाया  है।

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले ही महागठबंधन दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है। महागठबंधन के सहयोगी हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा ने साफ लफ्जों में कह दिया है कि बिहार और झारखंड विधानसभा चुनाव पार्टी अपने दम पर अकेले ही लड़ेगी। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी द्वारा यह फैसला लिया गया है।

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जीतनराम मांझी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके द्वारा कई बार दोहराने के बाद भी महागठबंधन में को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन नहीं हो पाया  है। जिसके चलते गठबंधन के सहयोगियों के बीच सही से तालमेल नहीं बैठ पाया है ऐसे हालातों में अकेले चुनाव लडऩा ही बेहतर होगा। उन्‍होंने कहा कि बिहार के साथ ही झारखंड विधानसभा चुनाव  में भी पार्टी अकेले ही किस्मत आजमाएगी। साथ ही मांझी ने बताया कि बिहार में एनआरसी लागू होने की स्थिति में दलित-मुस्लिम एकता कायम करने के लिए पार्टी कार्य करेगी। मांझी ने सदस्यता अभियान जारी रखते हुए 30 दिसंबर तक हर हाल में बूथ स्तरीय कमेटी गठित करने की भी बात कही। ऐसा नहीं करने वाले नेता 30 दिसंबर के बाद अध्यक्ष नहीं रहेंगे।

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बता दें कि  झारखंड चुनाव की आगे की गतिविधियां संचालित करने के लिए उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव संतोष कुमार सुमन को अधिकृत किया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी द्वारा झारखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से कौन-कौन प्रत्याशी होंगे इसका फैसला 10 नवंबर को लिया जाएगा।

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