केन्द्र की मोदी सरकार अब तक इस बात से इनकार करती रही है कि भारत की अर्थव्यवस्था पर मंदी का कोई असर नहीं है।

भारत की आर्थिक मंदी पर विदेशी विशेषज्ञों और संस्थानों ने बार-बार चिंता जताई है। अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नव निर्वाचित प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा है कि भारत जैसे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक मंदी ज़्यादा प्रभावी और साफ दिख रही है। बता दें कि केन्द्र की मोदी सरकार अब तक इस बात से इनकार करती रही है कि भारत की अर्थव्यवस्था पर मंदी का कोई असर नहीं है। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंधन निदेशक ने साफ कर दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंदी का असर दिखाई दे रहा है।

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IMF चीफ क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंदी का असर दिखाई दे रहा है’

साथ ही आईएमएफ की प्रबंधन निदेशक ने कहा, कि “चारों तरफ फैली मंदी का मतलब यह है कि साल 2019-20 के दौरान बढ़ोतरी दर इस दशक की शुरूआत से अब तक सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाएगी। तो वही क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि  “अमेरिका और जर्मनी में बेरोजगारी ऐतिहासिक निचले स्तर पर है।

IMF चीफ क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंदी का असर दिखाई दे रहा है’

बावजूद इसके अमेरिका, जापान और खास तौर पर यूरो क्षेत्र की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक गतिविधियों में नर्मी देखी गई है।”  IMF की MD के रूप में अपने पहले भाषण में क्रिस्टालिना जियॉरजीवा ने कहा, “दो साल पहले, वैश्विक अर्थव्यवस्था समकालिक रूप से ऊंचाई की तरफ जा रही थी, और दुनिया का लगभग 75 हिस्सा बढ़ रहा था। लेकिन अब वैश्विक अर्थव्यवस्था ‘समकालिक मंदी’ की चपेट में है।

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IMF चीफ क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंदी का असर दिखाई दे रहा है’

साथ ही कहा कि वर्ष 2019 में हमें लगता है कि दुनिया के लगभग 90 फीसदी हिस्से में वृद्धि कम होगी। बता दें कि मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कई कदम उठाए हैं। विदेशी निवेशकों को राहत देते हुए सुपर रिच टैक्स रेट घटाया गया। उद्योग जगत को कॉर्पोरेट टैक्स में राहत दी गई है। तो वही एमएसएमई  सेक्टर को राहत देते हुए GST रिफंड के नियम आसान किए गए और समय सीमा घटाई गई। स्टार्टअप में तेजी लाने के लिए प्रक्रिया आसान बनाई गई है साथ ही टैक्स में भी राहत दी गई है। तो वही रिजर्व बैंक लगातार अपनी रीपो रेट घटा रहा है।

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