केंद्र सरकार रिठाला नरेला लाइन के साथ-साथ फेज की अन्य दोनों लाइनों पर भी मेट्रो की जगह मेट्रोलाइट कॉरिडोर बनाने पर विचार रही है।

केंद्र सरकार ने निर्माण लागत को कम करने के इरादे से रिठाला नरेला लाइन के साथ-साथ फेज की अन्य दोनों लाइनों पर भी मेट्रो की जगह मेट्रोलाइट कॉरिडोर बनाने पर विचार रही है। इन तीनों कॉरिडोर पर मेट्रो ट्रेनें चलाने के लिए पहले ही डीपीआर तैयार कर ली गई थी, लेकिन सरकार अब मेट्रोलाइट बनाने पर विचार कर रही है। सरकार को लग रहा है कि अगर मेट्रो की जगह मेट्रोलाइट बनाई गई तो इससे लागत में 25 से 40 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इसके अलावा ऑपरेशनल लागत मे भी खासी कमी आएगी।

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मेट्रोलाइट की विशेषताएं

मैट्रो की जगह मेट्रोलाइट कॉरिडोर बनाने पर विचार कर रही है केंद्र सरकार,

मेट्रोलाइट, मेट्रो रेल का ही एक छोटा रूप होगी। इसकी कुछ ऐसी विशेषताएं होंगी, जो इसे मौजूदा मेट्रो सिस्टम से अलग करेंगी। इसके स्टेशन लगभग बस स्टॉप की तरह के ही होंगे। भारत में यह अपनी तरह का पहला मेट्रोलाइट सिस्टम होगा। मेट्रोलाइट को अंडरग्राउंड नहीं बनाया जाएगा। यह जमीन पर ही ट्राम की तरह ही चलेगी।

मैट्रो की जगह मेट्रोलाइट कॉरिडोर बनाने पर विचार कर रही है केंद्र सरकार,

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के मुताबिक इसके स्टेशनों पर फेयर कलेक्शन गेट, एक्सरे मशीन, मेटल डिटेक्टर आदि नहीं लगाए जाएंगे। ना ही मेट्रो सिस्टम की तरह टोकन डालने पर गेट खुलेगा, बल्कि इसके लिए उसे टोकन को ट्रेन के अंदर ही लगे सिस्टम में एंट्री और बाहर जाते हुए टच करना होगा। इसके लिए चेकिंग भी होगी और अगर कोई चेकिंग में ऐसा पकड़ा गया, जिसने अपने कार्ड या टोकन को सिस्टम से टच करके सफर की जानकारी नहीं दी होगी तो उस पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।

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