इसरो ने ट्वीट कर के कहा कि लूनर सरफेस का अध्ययन करने के लिए उसका पेलोड बेहतर काम कर रहा है

नई दिल्ली: चंद्रयान 2 को लेकर अभी तक इसरो ने उम्मीदें नहीं छोड़ी है। इसरो चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश में लगातार जुटा हुआ है। नासा का कहना है कि अब तक विक्रम लैंडर से कोई डाटा प्राप्त नहीं हुआ है।

वहीं इसरो ने ट्वीट कर के कहा कि लूनर सरफेस का अध्ययन करने के लिए उसका पेलोड बेहतर काम कर रहा है, जिससे ऑर्बिटर पेलोड ने इस बात के सबूत दे दिए हैं कि अंतरिक्ष में वह अपनी जिम्‍मेदारी बखूबी निभा रहा है।

पेलोड ने चार्ज पार्टिकल्‍स और तीव्रता का पता लगा लिया है। इसरो ने कहा है कि सोडियम, कैल्शियम, एल्यूमीनियम, सिलिकॉन, टाइटेनियम और लोहे जैसे तत्वों का पता लगाने के लिए पेलोड को जैसे काम करना चाहिए, वैसे ही काम कर रहा है।

इतना ही नहीं, इसरो को यह भी उम्मीद है कि चंद्रमा की सतह पर जैसे ही दिन होगा वैसे ही विक्रम लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश की जाएंगी। आपकों बतादें कि सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ से कुछ मिनट पहले ‘विक्रम का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था।

इसके बाद से ही बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी लैंडर से संपर्क स्थापित करने के लिए ”हरसंभव कोशिशें कर रही है, लेकिन चंद्रमा पर रात शुरू होने के कारण 10 दिन पहले इन कोशिशों को स्थगित कर दिया गया था।

कुछ दिन पहले ऑर्बिटर ने जो तस्वीरें दी है  उसमें साफ तौर पर कहा गया कि विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई है। इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि ‘अभी यह संभव नहीं है, वहां रात हो रही है। शायद इसके बाद हम इसे शुरू करेंगे। हमारे लैंडिंग स्थल पर भी रात का समय हो रहा है। चंद्रमा पर रात होने का मतलब है कि लैंडर अब अंधेरे में जा चुका है। उन्होंने कहा, ”चंद्रमा पर दिन होने के बाद हम प्रयास करेंगे।

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